पटना: यह बड़ी ख़बर है। भरत तिवारी एनकाउंटर मामला गरमाया हुआ है। इसको लेकर पूरे देश में प्रतिक्रिया देखी जा रही है। बिहार पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर दबाव बढ़ गया है।
जानिए एनकाउंटर पर क्या:-
बिहार के भोजपुर जिले में हुए भरत तिवारी एनकाउंटर का विषय गरमा गया है। बिहार पुलिस की आलोचना हो रही है।।सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष के लोग पुलिस मुठभेड़ में भरत तिवारी के एनकाउंटर से गुस्से में हैं।
भोजपुर में पुलिस एनकाउंटर के बाद गुरुवार को ग्रामीणों का गुस्सा देखा गया। लोग सड़क पर उतर आए। विरोध प्रदर्शन हो रहा है।तमाम सवाल और विरोध के बीच अब बिहार सरकार ने भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में बड़ा निर्णय लिया है।मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस एनकाउंटर केस की न्यायिक जांच कराने का निर्णय किया है।
एनकाउंटर की न्यायिक जांच का निर्णय
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार को एक्स पर एक पोस्ट में भरत तिवारी एनकाउंटर केस की न्यायिक जांच कराने के बारे में जानकारी दी है। भरत तिवारी एनकाउंटर केस की हाईकोर्ट के रिटायर्ज जज द्वारा न्यायिक जांच कराई जाएगी मुख्यमंत्री ने बताया कि भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में 17 जून को हुई पुलिस मुठभेड़ की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के लिए उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा न्यायिक जांच कराने का निर्णय लिया गया है।
ग्रामीणों का जोरदार प्रदर्शन
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि न्यायिक जांच का उद्देश्य घटना के सभी पहलुओं की निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ जांच सुनिश्चित करना है। बता दें कि भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में पुलिस मुठभेड़ में मानसिक रूप से परेशान युवक भरत भूषण तिवारी की मौत हो गई थी। भरत तिवारी के शव के गांव में पहुंचने के बाद ग्रामीणों का आक्रोश भड़क उठा।गुरुवार की सुबह बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने बिलौटी गांव के समीप शव को सड़क पर रखकर आरा-बक्सर फोरलेन को जाम कर दिया। पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की।
उन्होंने कहा कि इस मामले में सीनियर पदाधिकारी को जांच करनी चाहिए और समय सीमा के अंदर जो भी इस मामले में दोषी हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने आगे अपनी ही सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि सरकार जब कहती है कि कोई भी अपराधी नहीं बचेगा, तो पुलिस भी अगर कोई अपराध करती है, तो उसे बचना नहीं चाहिए।
कैमूर में बिहार के मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि इस मामले की पूरी जांच होनी चाहिए।अगर मृतक विक्षिप्त था और अंत में उसने अपना हथियार भी फेंक दिया था, तब वहां पुलिसकर्मियों ने किस परिस्थिति में एनकाउंटर किया, यह गंभीर सवाल है।इसकी जांच होनी चाहिए और जांच कराई भी जाएगी।पुलिस के अनुसार, बुधवार को युवक भरत भूषण तिवारी ने फायरिंग शुरू कर दी, जिसके जवाब में पुलिस ने भी गोली चलाई।
यह एनकाउंटर पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। भरत तिवारी कोई आतंकवादी या अपराधी नहीं था। पुलिस उसे पहले मानसिक रूप से बीमार बता रही थी। फिर भी एनकाउंटर कर दिया गया जबकि उसने हथियार फेंक दिया था।
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