रांची: डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125 वीं जयंती 6 जुलाई को है। इसको लेकर कई कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। भारतीय जनता युवा मोर्चा के बैनर तले मोरहाबादी स्थित सेंट्रल लाइब्रेरी में छात्र सम्मलेन का आयोजन किया गया। इसे मुख्य रूप से सांसद और झारखंड भाजपा के उपाध्यक्ष प्रदीप वर्मा ने संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि देश की एकता और अखंडता के लिए डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने बलिदान दिया। नेहरू मंत्रिमंडल से इस्तीफा देकर डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने नेहरू सरकार का विरोध किया। उन्होंने कहा कि एक देश में दो संविधान और दो विधान नहीं चलेगा। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। यहां दूसरा कानून मान्य नहीं है।
प्रदीप वर्मा ने कहा कि डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने कश्मीर बिना परमिट के जाने का निर्णय लिया। उन्हें शेख अब्दुल्ला सरकार के द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया। हिरासत में ही उनकी मौत हो गई। उन्होंने देश के लिए बलिदान दिया।
प्रदीप वर्मा ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि आज यह विडंबना है कि डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बारे में लोग कम जानते हैं। यह सब साजिशन हुआ है। आज़ादी के बाद उनके योगदान को तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने गुमनामी में धकेल दिया गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारह साल के कार्यकाल में ऐसे कई विभूतियों के अवदान को सामने लाया गया जिन्हें जानने की जरूरत है। डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी की अगर तुलना हो सकती है तो वे हैं सरदार वल्लभ भाई पटेल।
सांसद प्रदीप वर्मा ने कहा कि झारखंड की राजधानी रांची में स्थित डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय का नाम बदलने की सोच यह बताती है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बारे में नहीं जानते हैं। डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने देश के लिए बहुत कुछ किया। वे सच्चे अर्थ में सपूत थे।
DSPMU के नाम बदलने के बारे जब झारखंड के 90 लाख बंगाली समाज के लोग जाने होंगे तो उन्हें कितनी पीड़ा हुई होगी। प्रदीप वर्मा ने आगे कहा कि डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बारे में लोगों को जानना चाहिए। इस कार्यक्रम में भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष शशांक राज, रांची जिलाध्यक्ष रोमित नारायण मौजूद थे।
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