*लोकसभा क्षेत्र के लिए पार्टी करा रही है सर्वेक्षण*

रांची – देश में लोकसभा के चुनाव अप्रैल में में होने हैं. मुश्किल से अधिक से अधिक 4 महीने का वक्त बचा है. वैसे चुनाव संबंधी अधिसूचना फरवरी में जारी हो जाएगी. जाहिर सी बात है. सभी दल लोकसभा चुनाव की तैयारी में लगे हुए हैं.केंद्र में राज कर रही भाजपा के लिए एक बार फिर से दिल्ली की सत्ता बनाए रखने की चुनौती है. इसके लिए पार्टी अंदर और बाहर हर तरफ काम कर रही है.देश की जनता को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर विश्वास है.जिस प्रकार से हर क्षेत्र में काम हुए हैं,उससे यह विश्वास बीजेपी नेताओं को हो रहा है कि एक बार फिर 2024 में नरेंद्र मोदी ही देश के प्रधानमंत्री बनेंगे.भारतीय जनता पार्टी की ही सरकार बनेगी.
*तो क्या हो रहा है पार्टी के अंदर*
लोकसभा का चुनाव पूरे देश में होता है. इस बार आई एन डी आई गठबंधन अपने को मजबूत बनाने का प्रयास कर रहा है. वैसे इसमें भी कई तरह के पेंच हैं जो धीरे-धीरे सामने आ रहा है. विधानसभा चुनाव के मद्देनजर मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ में गठबंधन के बीच गांठ देखने को मिल रही है.
देश स्तर पर चुनाव है तो जाहिर सी बात है कि झारखंड में भी चुनाव होगा. झारखंड में लोकसभा की 14 सीटें हैं.एनडीए फोल्डर में 12 सीटें हैं.भाजपा के खाते में 11 और आजसू के खाते में एक सीट है.भाजपा इस बार सभी 14 सीट जीतने का लक्ष्य निर्धारित करके काम कर रही है. उल्लेखनीय है कि चाईबासा और राजमहल लोकसभा की सीट क्रमशः कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा के पास है. पार्टी उपयुक्त उम्मीदवार के चयन के लिए सीटिंग और नॉन सीटिंग लोकसभा सीट पर सर्वे करवा रही है. इन दोनों सीटों पर अलग रणनीति के साथ काम हो रहा है. सूत्रों के अनुसार पुणे की एक एजेंसी के द्वारा सर्वेक्षण कराया जा रहा है.
*रांची लोकसभा सीट पर क्या हो रहा है,जानिए*
रांची लोकसभा सीट पर भेज आंतरिक सर्वेक्षण कराया जा रहा है.वैसे इससे पहले भी एक सर्वेक्षण हो चुका है. रांची लोकसभा क्षेत्र में पार्टी के लिए चुनौती बड़ी है. कई जगह का सर्वेक्षण बताता है कि लोगों को अपने जन्म प्रतिनिधि से संतुष्टि नहीं है. रांची लोकसभा सीट से संजय सेठ फिलहाल सांसद हैं. संजय सेठ का दावा है कि उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र में यथासंभव अधिक से अधिक विकास के काम किए हैं. लेकिन कई स्थानों से लोगों में निराशा जैसे बयान देखे जा रहे हैं. चाहे वह क्षेत्र सिल्ली के ग्रामीण इलाकों का हो या फिर ओरमांझी क्षेत्र का, लोगों को पेयजल और बिजली की आधारभूत संरचना की शिकायत है. लोगों का यह भी कहना है कि उनके सांसद उनके क्षेत्र में नहीं आते हैं कई स्थानों से सड़क नहीं होने की भी शिकायत है.
खिजरी विधानसभा क्षेत्र भी रांची लोकसभा के अंदर आता है. यहां पर भी सड़क, बिजली पानी की समस्या को लेकर लोग नाराज हैं. लोगों का कहना है कि कई क्षेत्रों में आज भी सड़क नहीं है. पेयजल का संकट इस कदर है कि लोगों को पानी का जुगाड़ करने के लिए दूर-दूर जाना पड़ता है.पार्टी के अंदर भी कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखी जा रही है. हटिया विधानसभा क्षेत्र में रहने वाले भाजपा के एक नेता ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि पार्टी के कार्यकर्ता भी नाराज दिख रहे हैं. यह भी कहा जा रहा है कि सांसद आश्वासन तो तुरंत हाथों-हाथ दे देते हैं लेकिन काम पूरा नहीं होता. उधर सांसद संजय सेठ का कहना है कि कई ऐसी योजनाएं होती हैं जिनका क्रियान्वयन राज्य सरकार की एजेंसी करती है लेकिन राज्य में गैर भाजपा की सरकार विकास के काम पर फोकस नहीं रखती. इसलिए लोगों में नाराजगी देखी जा रही है. वैसे उन्होंने अपने स्तर से बेहतरीन काम किया है और कर रहे हैं.
पार्टी की केंद्रीय इकाई के द्वारा कराए जा रहे आंतरिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट के आधार पर लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार तय होगा. वर्तमान समय में संजय सेठ यहां से सांसद हैं. आने वाले समय में पार्टी सर्वेक्षण के आधार पर निर्णय लेगी. वैसे हम आपको बता दें कि प्रत्येक लोकसभा क्षेत्र से टिकट के लिए सीटिंग सांसद के अलावा दो अन्य नाम भेजे जाते हैं.यह काम प्रदेश चुनाव समिति करती है. इसकी अनुशंसा पर केंद्रीय इकाई निर्णय लेती है.कई बार सर्वेक्षण के आधार पर वैसे लोगों को भी टिकट मिल जाता है जो सीटिंग नहीं हैं या फिर प्रदेश की सूची से बाहर हैं.













