*राजनीतिक विश्लेषण : मोदी फैक्टर अपनी जगह,लेकिन प्रत्याशी भी बहुत मायने रखेगा चुनाव में*
रांची – यह अलग बात है कि देश में अभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जलवा है.कई ऐसे कारण बताएं जा रहे हैं जिस कारण से बीजेपी के फिर से सत्ता में आने की संभावना जताई जा रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 10 साल के काम को आधार बनाया जा रहा है. यानी कुल मिलाकर यही लग रहा है कि प्रधानमंत्री ही है सभी जगह पर परोक्ष रूप से चुनाव लड़ रहे हैं.
*भाजपा प्रत्याशियों के संबंध में राजशुमारी महज दिखावा*
कहा जाता है कि रायशुमारी एक प्रक्रिया होती है.भाजपा प्रत्येक आम चुनाव में प्रत्याशियों के चयन के लिए पार्टी के लोगों से ही सुझाव मांगती है कि किस निर्वाचन क्षेत्र से कौन सा चेहरा प्रत्याशी बनने लायक है. इस संबंध में फीडबैक लिया जाता है. वैसे भाजपा आम चुनाव से पहले लगातार 4-5 सर्वे कराती रहती है. इसकी प्रक्रिया साल भर पहले से भी शुरू हो जाती है. राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि भाजपा के सबसे बड़े चेहरे के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं. प्रत्याशियों का अपना आत्मविश्वास भले डगमगा रहा हो लेकिन प्रधानमंत्री के व्यक्तित्व और कृतित्व का लाभ उन्हें मिलता है. चूंकि लोकसभा चुनाव का क्षेत्र बड़ा होता है इसलिए भी प्रत्याशियों के बारे में लोगों को बहुत पता नहीं चल पाता है. ऐसे में पार्टी अपने कुछ मापदंडों के आधार पर प्रत्याशी चयनित कर देती है राजनीति की नजर समझने वाले लोगों का कहना है की रायशुमारी महज एक दिखावा है. यह पार्टी के नेता और कार्यकर्ताओं को संतुष्ट करने के लिए किया जाता है ऐसी पार्टी के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि यह पूरा सच नहीं है. राय शुमारी का भी अपना महत्व है.
-भाजपा ने झारखंड की 11 लोकसभा सीटों के प्रत्याशी तय किए हैं, इनके बारे में जान लीजिए-
लोकसभा चुनाव 2024 के लिए भाजपा ने झारखंड में बहुत तत्परता दिखाते हुए 11 लोकसभा सीटों के लिए प्रत्याशियों के नाम की घोषणा कर दी है.ऐसा लग रहा था कि पहली सूची में चार-पांच नाम हो सकते हैं. पर भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व बहुत जल्दबाजी दिखाते हुए 11 लोकसभा सीटों के प्रत्याशियों के नाम तय कर दिए. अधिकांश पुराने चेहरों को रिपीट कर दिया गया है. कई ऐसे वर्तमान सांसदों के खिलाफ संगठन के अंदर भी नाराजगी थी और आम लोगों में भी, उन्हें भी दोबारा टिकट दे दिया गया.
-क्या कहते हैं राजनीतिक विश्लेषक-
राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि कई लोकसभा सीट पर वर्तमान सांसदों की स्थिति अच्छी नहीं है.दुमका, पलामू, जमशेदपुर, रांची जैसे प्रमुख लोकसभा क्षेत्र हैं जहां पार्टी के नेता और कार्यकर्ता अपने सांसद से नाराज रहे हैं. वैसे संगठन के एक नेता कहते हैं कि भाजपा में यह संस्कृति है कि पार्टी जो तय कर देती है तो नेता और कार्यकर्ता अपना असंतोष नहीं दिखाते हैं. उनके सामने कमल फूल होता है ना कि चेहरा. पर राजनीतिक समझ रखने वाले लोगों का कहना है कि अगर हम रांची लोकसभा सीट की बात करें तो इसका क्षेत्रफल काफी बड़ा है. लोगों में अपने सांसद के प्रति बहुत उत्साह जनक प्रतिक्रिया नहीं है. नाम नहीं छापने की शर्त पर ईचागढ़ के कुछ भाजपा नेता कहते हैं कि विकास का काम कम और गप्पें पर ज्यादा हुई हैं. रांची लोकसभा क्षेत्र के लगभग सभी विधानसभा क्षेत्र में पेयजल की समस्या सबसे गंभीर है. हटिया विधानसभा क्षेत्र में भी जनता पेयजल समस्या से परेशान है. इसका खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ सकता है.सड़क निर्माण को लेकर सांसद संजय सेठ अभी क्षेत्र के लोगों की उम्मीद पर खड़े नहीं उतरे हैं. यह कहा जाता है कि लोकसभा चुनाव में मोदी का चेहरा एक बड़ा फैक्टर होगा पर प्रत्याशी की एंटी इनकंबेंसी भी बहुत मायने रखती है. उपरोक्त जिन लोकसभा क्षेत्र की चर्चा की गई वहां के वर्तमान सांसदों के बारे में जनता के बीच बहुत अच्छी छवि नहीं देखी जा रही है. वैसे लोकसभा चुनाव का परिणाम यह सब कुछ स्पष्ट कर देगा. रांची के सांसद संजय सेठ ने कहा कि उनके क्षेत्र की जनता का एक बार फिर से आशीर्वाद मिलेगा.अगले टर्म में वे अपने लोकसभा क्षेत्र का कायाकल्प कर देंगे.
इस मुद्दे पर कांग्रेस के प्रदेश महासचिव राकेश सिन्हा ने कहा है कि भाजपा को लोकसभा चुनाव में पता चल जाएगा.रांची समेत अधिकांश लोकसभा सीटों पर भाजपा की हार होगी. गठबंधन के प्रत्याशी जीतेंगे. रांची लोकसभा क्षेत्र के सांसद ने लोगों को ठगा है. इसलिए इस बार क्षेत्र की जनता हिसाब- किताब पूरा कर लेगी.











