झारखंड मुक्ति मोर्चा की मंशा स्पष्ट हो रही, क्या और क्यों ऐसा कहा भाजपा नेता प्रदीप वर्मा ने-
रांची – साल 2023 के अंतिम दिन जिस प्रकार से आनन-फानन में चोरी- चुपके गांडेय से झारखंड मुक्ति मोर्चा के विधायक सरफराज अहमद का इस्तीफा ले लिया गया.तुरंत उसे स्पीकर द्वारा स्वीकृत कराया गया.इससे स्पष्ट है कि इतनी हड़बड़ी का मतलब ही कुछ और होता है. राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि सब कुछ वैसा ही है जैसा कि लोग सोच रहे थे और आज भी समझ रहे हैं. यह सीट खाली करवाई गई इसलिए कि अगर ईडी के द्वारा कोई बड़ी कार्रवाई मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लेकर की जाती है तो ऐसे में राज्य सत्ता यानी सिंहासन मुख्यमंत्री अपनी धर्मपत्नी के लिए सुरक्षित कर सकते हैं और उन्हें 6 महीने के अंदर चुनाव लड़वा कर विधिवत उनको विधानसभा का सदस्य बनवा सकते हैं. भाजपा नेताओं का यह मानना है कि सारा रणनीति ऐसी ही बनाई गई थी. जब यह समझ में आ गया कि उपचुनाव करवाने का मामला खटाई में पड़ सकता है तो फिर मुख्यमंत्री की ओर से यह बयान आया कि यह सब बीजेपी के इशारे पर मीडिया की लफ्फाजी है.
बीजेपी के प्रदेश महामंत्री प्रदीप वर्मा कहते हैं कि झारखंड में एक संवैधानिक संकट उत्पन्न करने का प्रयास किया गया.जब दांव उल्टा पड़ने लगा तब मुख्यमंत्री बैकफुट पर आ गए. अब चुनाव आयोग पर दबाव डाला जा रहा है कि जल्द से जल्द खाली हुई गांडेय विधानसभा सीट पर चुनाव कराया जाए.
बीजेपी के प्रदेश महामंत्री प्रदीप वर्मा कहते हैं कि सब कुछ साफ-साफ दिख रहा है कि एक वरिष्ठ अल्पसंख्यक विधायक सरफराज अहमद से इस्तीफा क्यों लिया गया. अब उपचुनाव की हड़बड़ी भी बता दे रही है कि सत्ता पक्ष की छटपटाहट किस लिए है. भाजपा नेता ने आगे यह भी कहा कि अब इस खाली पड़ी विधानसभा सीट पर चुनाव संभव नहीं है.





