*जानिए अमर कुमार बाउरी के विधायक दल के नेता बनने की कहानी, क्यों पीछे रह गए जेपी भाई पटेल*

रांची: अमर कुमार बाउरी को पार्टी ने भाजपा विधायक दल का नेता मनोनीत कर दिया है. इस निर्णय को लेने में केंद्रीय नेतृत्व को ढाई महीने लग गए.इसका मतलब है कि विधायकों की राय शुमारी में उस समय जयप्रकाश भाई पटेल का नाम जो चल रहा था, उस पर विरोध उत्पन्न हो गया था. इसलिए घंटों रायशुमारी के बाद भी उसे दिन नाम की घोषणा नहीं हो सकी थी. इसके लिए विशेष रूप से केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे रांची आए थे. पर तत्काल कुछ नहीं कर पाए वैसे वह दिल्ली लौटने से पहले संकेत दिए थे कि दो-चार दिनों में भाजपा विधायक दल के नेता का नाम घोषित कर दिया जाएगा. पर ऐसा हुआ नहीं.
*पार्टी के अंदर विरोध बड़ा कारण रहा*
जिस दिन भाजपा विधायक दल की बैठक प्रदेश कार्यालय में बुलाई गई थी. उस दिन यह लगभग तय माना आना जा रहा था कि जयप्रकाश भाई पटेल ही विधायक दल के नेता होंगे. इससे पहले वह भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से भी मिल आए थे. पार्टी के अंदर खाने से जो खबर आई उसके अनुसार जयप्रकाश भाई पटेल के नाम पर कई पुराने विधायकों को ऐतराज था. पार्टी यह चाहती थी कि महतो समाज से विधायक दल का नेता चुने जाने से वह इस जाति विशेष का वोट बैंक साध लेगी लेकिन पार्टी की यह मनोकामना पूरी नहीं हुई. भाजपा भले पहले कि वह जाति धर्म से जरा भी प्रभावित नहीं होती लेकिन होता है यही.
अमर कुमार बाबरी वर्तमान में भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के अध्यक्ष भी हैं. उन्हें विधायक दल का नेता चुने जाने का एक प्रमुख वजह है कि वह अनुसूचित जाति वर्ग से आते हैं. सामाजिक समीकरण को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने यह निर्णय लिया है. अमर कुमार बाउरी बाबूलाल मरांडी का स्थान लेंगे. भाजपा में शामिल होने के बाद बाबूलाल मरांडी को पार्टी ने विधायक दल का नेता बनाया था लेकिन दल बदल के दांवपेंच में यह मामला लटक गया.आज भी स्पीकर ट्रिब्यूनल में यह मामला चल ही रहा है.
*जेपी भाई पटेल बने सचेतक*
पार्टी के इस निर्णय से जयप्रकाश भाई पटेल को थोड़ी निराशा जरूर हुई होगी. जिस समय इसको लेकर के कवायद हो रही थी, उस समय एक तरह से उनका नाम तय माना जा रहा था. कुछ विधायकों ने कथित रूप से बाहरी भीतरी का मामला उठा दिया. आखिरकार जेपी भाई पटेल का मामला लटक गया और अमर कुमार बाउरी को यह सम्मान मिल गया.
*पार्टी में फिर शुरू हुई कानाफूसी*
भाजपा के अंदर पार्टी के नेताओं के बीच कानाफूसी शुरू हो गई है. कई लोगों का कहना है कि सीपी सिंह जो इतने वरिष्ठ विधायक हैं, उन्हें बनाया जाना चाहिए था. सी पी सिंह के नाम को लेकर भले ही चर्चा रही हो लेकिन पार्टी के अंदर जातीय समीकरण प्रमुख स्थान रखता है. भाजपा के अंदर अनुशासन का डंडा इतना खड़ा होता है कि लोग पार्टी नेतृत्व के निर्णय के खिलाफ कुछ बोलते नहीं हैं.यह इस पार्टी की अच्छाई है या फिर कहें कमजोरी भी. अमर कुमार बावरी भाजपा विधायक दल के नेता हो गए हैं तो वह अब वे नेता प्रतिपक्ष का भी दर्जा प्राप्त कर लेंगे. सरकार के कई आयोग, बोर्ड में नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी.(DESK)













