
बिहार में छात्र आंदोलन और उसके बाद हुई पुलिस कार्रवाई का मामला अब राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है। बिहार बंद के दौरान गिरफ्तार किए गए छात्रों और प्रदर्शनकारियों की रिहाई की मांग तेज हो गई है। इस मामले को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार और पुलिस प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। वहीं, राजद सांसद मनोज झा प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं। जानकारी के मुताबिक, बिहार बंद के दौरान गिरफ्तार किए गए करीब 200 छात्रों और अन्य प्रदर्शनकारियों को पटना के छज्जूबाग स्थित जज आवास पर पेश किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में परिजन अपने बच्चों की रिहाई की उम्मीद में बाहर इंतजार करते नजर आए। पुलिस ने गिरफ्तार लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। राजद नेता और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने गिरफ्तार छात्रों की रिहाई की मांग करते हुए सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने कहा कि अगर छात्रों और अन्य प्रदर्शनकारियों को जल्द नहीं छोड़ा गया, तो पार्टी बड़े आंदोलन की तैयारी करेगी। वहीं, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

पटना कॉलेज समेत कई जगहों पर छात्रों ने अपने साथियों की रिहाई की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। कई छात्रों ने गीत और डफली के जरिए शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी। दूसरी ओर, पुलिस ने हिंसा और उपद्रव के मामलों में कार्रवाई जारी रखते हुए कई जिलों में गिरफ्तारियां की हैं। छपरा, सीवान और अन्य जिलों में भी प्रदर्शन से जुड़े मामलों में एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस का कहना है कि कार्रवाई सबूतों के आधार पर की जा रही है और निर्दोष लोगों को परेशान नहीं किया जाएगा। अब सभी की नजरें इस मामले में होने वाली न्यायिक सुनवाई और सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। छात्रों की गिरफ्तारी, पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शन के मुद्दे पर बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।

