
आज का दिन उन अभ्यर्थियों और उनके परिवारों के लिए बेहद भारी है, जिनकी मेहनत से मिली नौकरी एक सरकारी फैसले के बाद उनके हाथों से चली गई। परीक्षा पास करने, लंबे इंतजार और संघर्ष के बाद जिन लोगों को रोजगार मिला था, उनके लिए नौकरी सिर्फ एक पद नहीं थी, बल्कि उनके परिवार की उम्मीद, और भविष्य का सहारा भी थी।
बताया जा रहा है कि सरकार के एक फैसले से 1,932 से 1,975 चयनित अभ्यर्थी प्रभावित हुए हैं, जिनमें ऐसे लोग भी शामिल हैं जिन्हें परीक्षा पास करने के बाद नौकरी मिल चुकी थी। किसी ने नौकरी मिलने के बाद अपने परिवार के लिए बेहतर जिंदगी के सपने देखे होंगे, किसी ने घर बनाने की योजना बनाई होगी, तो किसी ने अपनी बहन या बेटी की शादी की उम्मीद लगाई होगी। लेकिन आज वही लोग अपने अधिकार और रोजगार की मांग को लेकर सड़क पर उतरने को मजबूर हैं।
सबसे ज्यादा दर्द उन परिवारों का है, जिनके घर में नौकरी लगने के बाद उम्मीद की एक नई रौशनी जगी थी और आशा की किरण के रूप में आई थी . लेकिन एक फैसले ने उन सपनों को फिर से अनिश्चितता में डाल दिया है। न जाने कितने घरों की रोजी-रोटी पर इसका असर पड़ा है और न जाने कितने परिवारों ने अपने भविष्य की योजनाएं नौकरी के भरोसे बनाई थीं।
पीड़ित लोगों का कहना है कि सरकार ने छात्र आंदोलनकारियों की आड़ में यह फैसला अपने हित में लिया है। और सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

