करीब 12 साल पुराने चर्चित दुष्कर्म मामले में तहलका पत्रिका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को बड़ा कानूनी झटका लगा है। बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने ट्रायल कोर्ट द्वारा 2021 में दिए गए बरी करने के फैसले को रद्द करते हुए उन्हें दोषी करार दिया है। अदालत ने कहा कि अब मामले में सजा तय करने के लिए दोनों पक्षों की दलीलें सुनी जाएंगी।
यह मामला वर्ष 2013 का है, जब तहलका की एक महिला सहकर्मी ने आरोप लगाया था कि गोवा के एक पांच सितारा होटल की लिफ्ट में तरुण तेजपाल ने उसके साथ यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म किया। इस घटना के बाद मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बना था और पुलिस ने तेजपाल को गिरफ्तार किया था।
हालांकि, लंबी सुनवाई के बाद गोवा की ट्रायल कोर्ट ने वर्ष 2021 में सबूतों के अभाव का हवाला देते हुए उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया था। राज्य सरकार ने इस फैसले को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। अब हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को गलत ठहराते हुए उसे निरस्त कर दिया है और तरुण तेजपाल को भारतीय दंड संहिता (IPC) की संबंधित धाराओं के तहत दोषी माना है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि दोष सिद्ध होने के बाद अब सजा के मुद्दे पर विस्तार से बहस होगी। तब तक तरुण तेजपाल को आत्मसमर्पण करने की प्रक्रिया पर अदालत के निर्देशों का पालन करना होगा।
दोषी ठहराए जाने के बाद बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत से सजा में नरमी बरतने की अपील की। उन्होंने दलील दी कि यह आरोपी का पहला अपराध है, उनकी उम्र 62 वर्ष है और उन्होंने पहले भी लगभग छह महीने न्यायिक हिरासत में बिताए हैं। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।
दूसरी ओर, अभियोजन पक्ष की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में कहा कि आरोपी ने अपने कथित कृत्य को लेकर कभी पछतावा नहीं दिखाया। उनके अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए सजा तय करते समय इस पहलू को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
अदालत ने तरुण तेजपाल को भी अपनी बात रखने का अवसर दिया। उन्होंने कहा कि वह लंबे समय तक पत्रकारिता से जुड़े रहे हैं, उनका परिवार है और अब उनके पास उच्चतम न्यायालय में अपील करने का कानूनी अधिकार उपलब्ध है।
अब इस बहुचर्चित मामले में सभी की नजर अदालत के अगले फैसले पर है, जिसमें यह तय होगा कि दोषी करार दिए जाने के बाद तरुण तेजपाल को कितनी सजा सुनाई जाती है।

