रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) सिविल सेवा परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर CID ने अपनी जांच तेज कर दी है। जांच एजेंसी अब प्रारंभिक परीक्षा (PT) में सफल घोषित अभ्यर्थियों से उनकी OMR शीट की कॉपी जुटा रही है। CID ने अभ्यर्थियों से पेपर-1 और पेपर-2 की OMR शीट की कार्बन कॉपी उपलब्ध कराने की अपील की है, ताकि परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों की जांच की जा सके।
CID की विशेष जांच टीम (SIT) ने सफल अभ्यर्थियों के लिए संपर्क माध्यम भी जारी किए हैं। अभ्यर्थी अपनी OMR शीट की कार्बन कॉपी का PDF बनाकर या उसकी स्पष्ट तस्वीर लेकर जांच एजेंसी को भेज सकते हैं। इसके लिए CID ने WhatsApp नंबर 9934309058 और ईमेल आईडी Complainjpsc.cid@jhpolice.gov.in जारी की है। एजेंसी का उद्देश्य परीक्षा में हुई संभावित गड़बड़ियों से जुड़े सबूतों को एकत्र करना और पूरी प्रक्रिया की जांच करना है।
पूर्व JPSC अध्यक्ष से लगातार पूछताछ
JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते से CID ने लगातार दूसरे दिन भी पूछताछ की। अधिकारियों ने उनसे परीक्षा संचालन, चयन प्रक्रिया, दस्तावेजों और भर्ती से जुड़े कई अहम मुद्दों पर जानकारी ली। जांच टीम उपलब्ध रिकॉर्ड और अन्य लोगों के बयानों का मिलान कर पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी हुई है।
पूछताछ पूरी होने के बाद उन्हें जाने दिया गया, लेकिन CID ने उन्हें दोबारा 31 जुलाई को पूछताछ के लिए बुलाया है। जांच एजेंसी इस मामले में हर पहलू की गहन पड़ताल कर रही है।
श्वेता गुप्ता की भूमिका भी जांच के दायरे में
JPSC से जुड़े मामले में चर्चा में आईं श्वेता गुप्ता को लेकर भी कई जानकारियां सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि वर्ष 2023 में वह JPSC में अवर सचिव सह उप परीक्षा नियंत्रक के पद पर आई थीं। मई 2026 में उनका स्थानांतरण खाद्य आपूर्ति विभाग में किया गया था, लेकिन उन्होंने तत्काल नए पद पर योगदान नहीं किया।
बाद में कार्मिक विभाग की ओर से सख्त निर्देश मिलने के बाद उन्होंने स्थानांतरित पद पर योगदान दिया। इसके बाद कुछ समय के लिए उन्हें दोबारा JPSC में प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया। इसी दौरान CID की कार्रवाई हुई और श्वेता गुप्ता की गिरफ्तारी हुई।
परीक्षा प्रक्रिया पर उठे सवालों की जांच
JPSC सिविल सेवा परीक्षा विवाद के बाद CID यह पता लगाने में जुटी है कि परीक्षा संचालन में किसी तरह की अनियमितता हुई थी या नहीं। OMR शीट और अन्य दस्तावेजों की जांच के जरिए एजेंसी मामले की सच्चाई तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

