
भारतीय बैडमिंटन के लिए रविवार का दिन बेहद खास रहा। असम की 26 वर्षीय शटलर अश्मिता चालिहा ने कोरिया मास्टर्स सुपर 300 का खिताब अपने नाम कर लिया। महिला एकल के फाइनल में उन्होंने चीन की चौथी वरीयता प्राप्त हान कियान शी को रोमांचक मुकाबले में हराया।
53 मिनट तक चले इस मुकाबले में अश्मिता ने पहला गेम गंवाने के बाद शानदार वापसी की। उन्होंने अगले दोनों गेम अपने नाम किए और 14-21, 21-14, 21-14 से जीत दर्ज की। यह अश्मिता के करियर का पहला BWF वर्ल्ड टूर खिताब है।
पहले गेम में मिली चुनौती
फाइनल की शुरुआत अश्मिता ने अच्छी की। उन्होंने शुरुआती दौर में 3-0 की बढ़त बना ली थी। कुछ समय तक वह आगे भी रहीं, लेकिन हान कियान शी ने जल्द ही वापसी कर ली।
दोनों खिलाड़ियों के बीच मुकाबला 11-11 की बराबरी तक पहुंचा। इसके बाद चीनी खिलाड़ी ने अपनी रफ्तार बढ़ाई और लगातार अंक हासिल किए। अश्मिता को पहले गेम में 14-21 से हार का सामना करना पड़ा।
दूसरे गेम में बदला मैच का रुख
पहला गेम हारने के बाद अश्मिता ने शानदार तरीके से वापसी की। उन्होंने दूसरे गेम में ज्यादा आक्रामक खेल दिखाया। उनके स्मैश और डिफेंसिव रिटर्न ने हान को लगातार दबाव में रखा।
6-6 की बराबरी के बाद अश्मिता ने बढ़त बनानी शुरू की। इंटरवल तक वह 11-8 से आगे थीं। इसके बाद उन्होंने रैलियों पर अपनी पकड़ मजबूत रखी और 17-10 की बढ़त हासिल कर ली।
अश्मिता ने शानदार खेल जारी रखते हुए दूसरा गेम 21-14 से जीत लिया। अब मुकाबला निर्णायक गेम में पहुंच चुका था।
निर्णायक गेम में दिखा जबरदस्त आत्मविश्वास
तीसरे गेम की शुरुआत में दोनों खिलाड़ियों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। अश्मिता ने 5-2 की बढ़त बनाई, लेकिन हान ने वापसी करते हुए मिड-गेम ब्रेक तक 11-9 की बढ़त हासिल कर ली।
इसके बाद अश्मिता ने धैर्य नहीं खोया। उन्होंने सटीक शॉट्स और शानदार विनर्स के जरिए लगातार अंक जुटाए। एक बेहतरीन शॉट के साथ उन्होंने 12-11 की बढ़त हासिल की।
इसके बाद अश्मिता ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। क्रॉस-कोर्ट विनर के जरिए उन्होंने 19-14 की बढ़त बनाई। हान का रिटर्न बाहर जाते ही अश्मिता को चैंपियनशिप पॉइंट मिल गया।
अगले ही मौके पर अश्मिता ने मुकाबला खत्म कर दिया और 21-14 से निर्णायक गेम जीतते हुए पहली बार BWF वर्ल्ड टूर की चैंपियन बन गईं।
चोट के बाद की शानदार वापसी
अश्मिता की इस जीत की खास बात यह भी है कि उन्होंने गंभीर चोट के बाद वापसी करते हुए यह उपलब्धि हासिल की है। 2024 में कोरिया ओपन के दौरान उनके दाहिने घुटने में मेनिस्कस की चोट लगी थी। इसके बाद उन्हें सर्जरी और लंबे रिहैबिलिटेशन से गुजरना पड़ा।
वापसी के बाद अश्मिता ने लगातार मेहनत की। उन्होंने चाइना मास्टर्स और मलेशिया मास्टर्स में क्वार्टर फाइनल तक का सफर तय किया। इसके बाद मकाऊ ओपन में सेमीफाइनल तक पहुंचीं।
अब कोरिया मास्टर्स का खिताब जीतकर अश्मिता ने अपने करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है। उनकी यह जीत भारतीय महिला बैडमिंटन के लिए भी बड़ी उम्मीद लेकर आई है। इससे पहले तन्वी शर्मा ने ताइपे ओपन का खिताब जीता था। लगातार दो सप्ताह भारतीय महिला खिलाड़ियों की BWF टूर पर जीत ने बैडमिंटन प्रेमियों के बीच उत्साह बढ़ा दिया है।

