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Europe Heatwave: क्या यूरोप भीषण गर्मी की चपेट में? स्लोवाकिया और ऑस्ट्रिया में टूटा दशकों का तापमान रिकॉर्ड

@karishma

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Aug 06, 2026 · 2:44 PM
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Europe Heatwave: क्या यूरोप भीषण गर्मी की चपेट में? स्लोवाकिया और ऑस्ट्रिया में टूटा दशकों का तापमान रिकॉर्ड
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यूरोप इन दिनों भीषण गर्मी की मार झेल रहा है। लगातार बढ़ते तापमान ने कई देशों में नए रिकॉर्ड बना दिए हैं। खासकर स्लोवाकिया और ऑस्ट्रिया में इस सप्ताह इतिहास का सबसे अधिक तापमान दर्ज किया गया, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हुआ है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि लगातार बढ़ रही हीटवेव जलवायु परिवर्तन के गंभीर संकेतों में से एक है।

स्लोवाक मौसम विज्ञान संस्थान के अनुसार, देश के दक्षिणी हिस्से में स्थित कामेनिका नाद ह्रोनोम शहर में तापमान 41.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह अब तक का सबसे अधिक तापमान है। इससे पहले भी इसी गर्मी के मौसम में जून के अंत में दो बार रिकॉर्ड टूट चुके थे। पहले टुर्ना नाद बोडवो में 41.0 डिग्री और फिर कामेनिका नाद ह्रोनोम में 41.3 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया था।

इस नए रिकॉर्ड ने वर्ष 2007 में हर्बानोवो शहर में दर्ज 40.3 डिग्री सेल्सियस के पुराने राष्ट्रीय रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया। लगातार तीसरी बार रिकॉर्ड तापमान दर्ज होना विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय बन गया है।

उधर, पड़ोसी देश ऑस्ट्रिया में भी भीषण गर्मी ने नया इतिहास रच दिया। जियोस्फीयर मौसम सेवा के अनुसार, स्लोवाकिया की सीमा के पास स्थित बैड डॉयच-आल्टेनबर्ग में तापमान 41.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह ऑस्ट्रिया के इतिहास का सबसे अधिक तापमान माना जा रहा है। इससे एक दिन पहले ही 41.0 डिग्री सेल्सियस का रिकॉर्ड बना था, जिसे अगले ही दिन पीछे छोड़ दिया गया।

केवल स्लोवाकिया और ऑस्ट्रिया ही नहीं, बल्कि चेक गणराज्य और हंगरी में भी इस वर्ष गर्मी के नए रिकॉर्ड दर्ज किए गए हैं। लगातार बढ़ते तापमान ने स्वास्थ्य, कृषि और जल संसाधनों पर दबाव बढ़ा दिया है। विशेषज्ञ लोगों को धूप से बचने, पर्याप्त पानी पीने और प्रशासन की ओर से जारी हीटवेव एडवाइजरी का पालन करने की सलाह दे रहे हैं।

वैज्ञानिकों का मानना है कि दुनिया के कई हिस्सों में लगातार बढ़ती गर्मी और रिकॉर्ड तापमान जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को और स्पष्ट कर रहे हैं। यदि ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में ऐसी चरम मौसम घटनाएं और अधिक गंभीर रूप ले सकती हैं। फिलहाल यूरोप के कई देशों में भीषण गर्मी से राहत मिलने के कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिखाई दे रहे हैं। 

 

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