भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार बल्लेबाज श्रेयस अय्यर सीमित ओवरों के क्रिकेट में अपनी उपयोगिता कई बार साबित कर चुके हैं। वनडे में मिडिल ऑर्डर की मजबूत कड़ी और टी20 क्रिकेट में नेतृत्व क्षमता दिखाने वाले अय्यर का टेस्ट करियर हालांकि उम्मीदों के मुताबिक आगे नहीं बढ़ पाया। एक समय उन्हें भारत के तीनों फॉर्मेट का अहम खिलाड़ी माना जाता था, लेकिन पिछले कुछ समय से टेस्ट टीम में उनका नाम नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर ऐसा क्या हुआ जिसने उन्हें रेड बॉल क्रिकेट से दूर कर दिया।
श्रेयस अय्यर ने साल 2021 में टेस्ट क्रिकेट में शानदार आगाज किया था। न्यूजीलैंड के खिलाफ अपने डेब्यू मुकाबले में उन्होंने पहली पारी में शतक लगाकर सभी का ध्यान खींचा। दूसरी पारी में भी अर्धशतक बनाकर उन्होंने साबित कर दिया कि वह लंबे फॉर्मेट में भी सफल हो सकते हैं। शुरुआती मुकाबलों में उनका आत्मविश्वास और बल्लेबाजी तकनीक दोनों प्रभावशाली रहे।
इसके बाद अय्यर को लगातार मौके मिले और उन्होंने कई महत्वपूर्ण पारियां भी खेलीं। लेकिन उनका करियर उस समय प्रभावित होने लगा जब उन्हें पीठ से जुड़ी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ा। लगातार चोटों के कारण उन्हें कई अहम टेस्ट सीरीज से बाहर रहना पड़ा। चोट से उबरने की प्रक्रिया लंबी रही और बीच-बीच में फिटनेस संबंधी परेशानियां भी सामने आती रहीं। इससे उनकी लय टूट गई और टीम में नियमित जगह भी प्रभावित हुई।
जब अय्यर मैदान से बाहर थे, उसी दौरान भारतीय टीम में कई युवा बल्लेबाजों ने शानदार प्रदर्शन किया। नए खिलाड़ियों ने मिले अवसरों का पूरा फायदा उठाया, जिससे टीम प्रबंधन के पास मिडिल ऑर्डर के कई विकल्प तैयार हो गए। ऐसे में अय्यर की वापसी पहले की तुलना में और कठिन हो गई।
हालांकि सीमित ओवरों के क्रिकेट में श्रेयस अय्यर लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन करते रहे। वनडे क्रिकेट में उन्होंने कई मैच जिताऊ पारियां खेलीं और टी20 क्रिकेट में भी अपनी कप्तानी और बल्लेबाजी से पहचान बनाई। यही वजह है कि सफेद गेंद के क्रिकेट में उनका महत्व बना हुआ है, लेकिन टेस्ट टीम में जगह बनाने के लिए उन्हें घरेलू क्रिकेट और भविष्य के अवसरों में लगातार बेहतरीन प्रदर्शन करना होगा।
क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि अय्यर के पास अनुभव और प्रतिभा दोनों मौजूद हैं। यदि वह पूरी तरह फिट रहते हैं और लगातार रन बनाते हैं, तो टेस्ट टीम में उनकी वापसी की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता। भारतीय टीम में प्रतिस्पर्धा पहले से कहीं अधिक बढ़ चुकी है, इसलिए अब केवल प्रतिभा ही नहीं बल्कि निरंतर प्रदर्शन और फिटनेस भी चयन का सबसे बड़ा आधार बन चुके हैं।
फिलहाल श्रेयस अय्यर का पूरा ध्यान अपनी फिटनेस बनाए रखने और हर मौके का पूरा फायदा उठाने पर होगा। यदि आने वाले घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में उनका प्रदर्शन प्रभावशाली रहता है, तो वह एक बार फिर भारतीय टेस्ट टीम में अपनी जगह बनाने की मजबूत दावेदारी पेश कर सकते हैं।

