नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित NEET परीक्षा और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान एक युवती का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो में युवती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया गया, जिसके बाद मामला पुलिस तक पहुंच गया। अब इस पूरे प्रकरण की जांच संबंधित एजेंसियां कर रही हैं।
वायरल वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई लोगों ने वीडियो में इस्तेमाल की गई भाषा की आलोचना की, जबकि कुछ लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग भी उठाई। विवाद बढ़ने के बाद युवती की पहचान रुचिका सिंह के रूप में सामने आई।
प्राथमिक जानकारी के अनुसार, रुचिका सिंह की उम्र लगभग 25 वर्ष बताई जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वह नोएडा के सेक्टर-168 क्षेत्र में रहती हैं और एक ब्यूटी सैलून में कार्यरत हैं। उनका मूल निवास हरियाणा के फरीदाबाद से जुड़ा बताया जाता है। विवाद के बाद उनका सोशल मीडिया अकाउंट उपलब्ध नहीं है। हालांकि, उनके और उनके परिवार के ठिकाने को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं, जिनकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
मामले में गाजियाबाद की एक अधिवक्ता द्वारा शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद नोएडा पुलिस ने जीरो FIR दर्ज की। शिकायत में आरोप लगाया गया कि वायरल वीडियो में संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली भाषा का प्रयोग किया गया है और इससे सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है।
क्योंकि कथित घटना दिल्ली के जंतर-मंतर क्षेत्र में हुई थी, इसलिए कानूनी प्रक्रिया के तहत जीरो FIR को आगे की जांच के लिए दिल्ली पुलिस के संबंधित थाने को भेज दिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध वीडियो, डिजिटल साक्ष्य और अन्य तथ्यों की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
जीरो FIR भारतीय कानून का ऐसा प्रावधान है, जिसके तहत कोई भी व्यक्ति घटना स्थल से अलग किसी भी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करा सकता है। इसके बाद संबंधित थाने को मामला जांच के लिए स्थानांतरित कर दिया जाता है। इस व्यवस्था का उद्देश्य शिकायत दर्ज कराने में देरी को रोकना और पीड़ित या शिकायतकर्ता को त्वरित कानूनी सहायता उपलब्ध कराना है।
फिलहाल इस मामले में जांच जारी है और पुलिस की ओर से अंतिम निष्कर्ष सामने आना बाकी है। ऐसे मामलों में जांच पूरी होने से पहले सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट दावों पर भरोसा करने के बजाय केवल आधिकारिक जानकारी पर ध्यान देना अधिक उचित माना जाता है।

