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अटल से झारखंड का रिश्ता: आंदोलन से संसद तक कैसे पहुंचा अलग राज्य का सपना?

@karishma

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Aug 16, 2026 · 1:19 PM
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अटल से झारखंड का रिश्ता: आंदोलन से संसद तक कैसे पहुंचा अलग राज्य का सपना?
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आज यानी 16 अगस्त 2026 को पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की आठवीं पुण्यतिथि है। इस मौके पर पूरे देश याद कर रहा है। और अगर झारखंड की बात करें तो अटल बिहारी वाजपेयी का नाम राज्य के गठन की कहानी से भी जुड़ा हुआ है। उनके प्रधानमंत्री रहते ही लंबे समय से चले आ रहे अलग झारखंड के आंदोलन को संवैधानिक मंजिल मिली और 15 नवंबर 2000 को झारखंड अस्तित्व में आया।

झारखंड के लिए क्यों खास हैं अटल बिहारी वाजपेयी?

अलग झारखंड की मांग कोई अचानक उठी राजनीतिक मांग नहीं थी। आदिवासी पहचान, क्षेत्र के विकास और राजनीतिक अधिकारों को लेकर यहां लंबे समय से आंदोलन चल रहा था। अलग-अलग दौर में कई सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों ने इस आंदोलन को आगे बढ़ाया।
इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि झारखंड सिर्फ किसी एक नेता या पार्टी के प्रयास से बना। इसके पीछे वर्षों का जनसंघर्ष रहा था। हालांकि, वर्ष 2000 में इस मांग को कानूनी और संवैधानिक रूप देने में तत्कालीन केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

वाजपेयी सरकार ने कैसे आगे बढ़ाई प्रक्रिया?

1990 के दशक में भाजपा ने भी अलग झारखंड राज्य की मांग को राजनीतिक समर्थन दिया। 1999 के लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन ने अलग राज्य के गठन को अपने एजेंडे में शामिल किया।

अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में केंद्र में एनडीए सरकार बनने के बाद बिहार के पुनर्गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ी। इसी क्रम में बिहार पुनर्गठन विधेयक, 2000 संसद में लाया गया।

लोकसभा ने 2 अगस्त 2000 को विधेयक को मंजूरी दी, जबकि राज्यसभा ने 11 अगस्त को इसे पारित किया। इसके बाद बिहार पुनर्गठन अधिनियम, 2000 के तहत बिहार के दक्षिणी हिस्से को अलग करके झारखंड बनाने का रास्ता साफ हो गया।

15 नवंबर 2000 को क्यों मिला झारखंड को राज्य का दर्जा

15 नवंबर 2000 झारखंड के इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण दिन है। इसी दिन बिहार से अलग होकर झारखंड देश का 28वां राज्य बना। यह तारीख भगवान बिरसा मुंडा की जयंती भी है, इसलिए राज्य गठन के लिए इस दिन का विशेष महत्व है।

रांची को झारखंड की राजधानी बनाया गया। दशकों से अलग राज्य की मांग को लेकर चले संघर्ष के बाद आखिरकार झारखंड को अपनी अलग पहचान मिली।

अटल और झारखंड की कहानी क्यों याद की जाती है?

झारखंड के गठन की कहानी में दो बातें साथ-साथ समझना जरूरी है। पहली, अलग राज्य की मांग के पीछे लंबे समय तक चला जनआंदोलन था। दूसरी, वर्ष 2000 में इस मांग को संवैधानिक रूप देने की प्रक्रिया संसद के जरिए पूरी हुई और उस समय केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी।

यही वजह है कि झारखंड की राजनीतिक स्मृतियों में अटल बिहारी वाजपेयी का नाम राज्य गठन के एक महत्वपूर्ण अध्याय से जुड़ा हुआ है।

पुण्यतिथि पर फिर याद आया झारखंड से रिश्ता

16 अगस्त 2026 को अटल बिहारी वाजपेयी की आठवीं पुण्यतिथि पर देश उनके राजनीतिक जीवन और राष्ट्र निर्माण में योगदान को याद कर रहा है। वहीं झारखंड के लिए उनकी विरासत का सबसे खास हिस्सा 15 नवंबर 2000 का वह ऐतिहासिक दिन है, जब लंबे संघर्ष के बाद राज्य का सपना हकीकत बना।

अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में संसद ने बिहार पुनर्गठन की प्रक्रिया को मंजूरी दी और उसी साल झारखंड भारत के नक्शे पर एक नए राज्य के रूप में उभरा। इसलिए अटल और झारखंड का रिश्ता आज भी राज्य के इतिहास और राजनीतिक चर्चा में खास महत्व रखता है।

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