PostNxt - Breaking News
Advertisement
Premium Placement

Grow Your Brand with PostNxt Media

Advertise Here

राज्यसभा में चुनाव सुधार पर विशेष चर्चा में शामिल हुए प्रदीप वर्मा

postnext

postnext

Dec 17, 2025 · 8:43 AM
Share:
राज्यसभा में चुनाव सुधार पर विशेष चर्चा में शामिल हुए प्रदीप वर्मा
Promoted Story

Reach 5 Million Readers Monthly Across Our Networks

Place your business advertisement on India's fastest-growing news portal.

Get Media Kit

न्यूज डेस्क : झारखंड भाजपा के वरिष्ठ नेता, महांत्री और सांसद प्रदीप कुमार वर्मा ने संसद के उच्च सदन में बेहतरीन तरीके से चुनाव सुधार के लिए भारत निर्वाचन आयोग के द्वारा किए जा रहे प्रयास की प्रशंसा करते हुए अपनी बात रखी। उन्होंने मंगलवार को विशेष चर्चा में भाग लिया। उन्होंने कहा कि 11 वर्षों से लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने का काम हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव सुधार प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची में मोबाइल नंबर जोड़ने का सुझाव दिया।

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों की सुरक्षा ,उनके सुदृढ़ीकरण के लिए संकल्पित है और पिछले 11 वर्षों से इस दिशा में लगातार कार्य कर रही है।

चुनाव सुधार की प्रक्रिया लोकतंत्र की जड़ को मजबूत करती है। यह मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया ठीक उसी प्रकार है जैसे हम घरों में पुराने फर्नीचर,पर्दों को बदलते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि भारत में 2002 और 2004 के बाद गहन मतदाता पुनरीक्षण की प्रक्रिया नहीं हुई ।इसलिए यह आवश्यक था कि अनपेक्षित नामों को हटाया जाए और जरूरी नामों को जोड़ा जाए। पिछले दिनों बिहार ने इतिहास रच दिया। बिहार में जहां 65 लाख लोग सूची से हटाए गए वहीं 21 लाख नए मतदाता जुड़े। यह मतदाता शुद्धिकरण का नतीजा है। चुनाव परिणाम सबके सामने है।चुनाव के बाद किसी दल ने एक बूथ पर भी पुनर्मतदान की मांग नहीं की। 1951 के बाद सर्वाधिक 67% मतदान का रिकॉर्ड बना। अभी 12 राज्यों में 51 करोड़ मतदाताओं के बीच पुनरीक्षण की प्रक्रिया चल रही है। जिसका एक मात्र उद्देश्य डुप्लीकेट मतदाता,को हटाना और शुद्ध मतदाता को जोड़ना है। विभाजन के बाद 1971 से करोड़ो शरणार्थी भारत में आए, साथ ही घुसपैठ भी बड़े पैमाने पर हुए।एक आंकड़े के अनुसार भारत में लगभग 2 करोड़ लोग अवैध रूप से रह रहे हैं। जो देश की आंतरिक सुरक्षा और अर्थव्यवस्था केलिए ठीक नहीं। साथ ही जनसंख्या संतुलन भी बिगड़ रहा है।

प्रदीप वर्मा ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 326 स्पष्ट कहता है कि मतदान का अधिकार सिर्फ भारत के नागरिक का है।1985 में सुप्रीम कोर्ट ने भी एसआईआर का समर्थन किया था। बिहार मामले में भी न्यायालय ने मतदाता पुनरीक्षण को सही माना। उन्होंने कहा कि चुनाव सुधार की दृष्टि से एक राष्ट्र एक चुनाव और राजनीति के अपराधीकरण को भी रोकने की दिशा में मोदी सरकार लगातार प्रयास कर रही है। हर वर्ष अलग अलग राज्यों में होने वाले चुनावों से देश की जीडीपी प्रभावित होती है,पैसे की बर्बादी होती है, शिक्षकों को चुनाव कार्य में लगाने से शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होती है। जबकि एक साथ चुनाव होने से देश के जीडीपी में साढ़े चार लाख करोड़ रुपए का योगदान बढ़ेगा। मोदी सरकार राजनीति के अपराधीकरण को रोकने केलिए भी संकल्पित है।जिसपर बोहरा समिति ने भी चिंता व्यक्त की थी।मोदी सरकार ने कानून बनाकर 30 दिनों के भीतर गंभीर आरोप में गिरफ्तारी के बाद जन प्रतिनिधियों को इस्तीफा देने का प्रावधान किया है।

उन्होंने कहा कि जो भी लोकतंत्र से प्यार करता है वह चुनाव सुधार प्रक्रिया का समर्थन करता है। अब तो इंडी गठबंधन के लोग भी चुनाव सुधार का समर्थन कर रहे। अब ईवीएम से जिन्न निकलना बंद हो गया है। चुनाव परिणाम शीघ्र और पारदर्शी है।

उन्होंने चर्चा के दौरान मतदाता सूची में मोबाइल नंबर जोड़ने का महत्वपूर्ण सुझाव दिया। जो मतदान प्रतिशत बढ़ाने में काफी सहायक होगा।चुनाव सुधार की प्रक्रिया लोकतंत्र की जड़ को मजबूत करती है। यह मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया ठीक उसी प्रकार है जैसे हम घरों में पुराने फर्नीचर,पर्दों को बदलते हैं।कहा कि भारत में 2002 और 2004 के बाद गहन मतदाता पुनरीक्षण की प्रक्रिया नहीं हुई ।इसलिए यह आवश्यक था कि अनपेक्षित नामों को हटाया जाए और जरूरी नामों को जोड़ा जाए।

प्रदीप वर्मा ने कहा कि पिछले दिनों बिहार ने इतिहास रच दिया। बिहार में जहां 65 लाख लोग सूची से हटाए गए वहीं 21 लाख नए मतदाता जुड़े। नतीजा सामने है ।चुनाव के बाद किसी दल ने एक बूथ पर भी पुनर्मतदान की मांग नहीं की। 1951 के बाद सर्वाधिक 67% मतदान का रिकॉर्ड बना। अभी 12 राज्यों में 51 करोड़ मतदाताओं के बीच पुनरीक्षण की प्रक्रिया चल रही है। जिसका एक मात्र मकसद डुप्लीकेट मतदाता,को हटाना और शुद्ध मतदाता को जोड़ना है। विभाजन के बाद 1971 से करोड़ो शरणार्थी भारत में आए, साथ ही घुसपैठ भी बड़े पैमाने पर हुए।एक आंकड़े के अनुसार भारत में लगभग 2 करोड़ लोग अवैध रह रहे हैं। जो देश की आंतरिक सुरक्षा और अर्थव्यवस्था केलिए ठीक नहीं। साथ ही जनसंख्या संतुलन भी बिगड़ रहा है। संविधान का अनुच्छेद 326 स्पष्ट कहता है कि मतदान का अधिकार सिर्फ भारत के नागरिक का है।1985 में सुप्रीम कोर्ट ने भी एसआईआर का समर्थन किया था। बिहार मामले में भी न्यायालय ने मतदाता पुनरीक्षण को सही माना।चुनाव सुधार की दृष्टि से एक राष्ट्र एक चुनाव और राजनीति के अपराधीकरण को भी रोकने की दिशा में मोदी सरकार लगातार प्रयास कर रही है। हर वर्ष अलग अलग राज्यों में होने वाले चुनावों से देश का जीडीपी प्रभावित होता है,पैसे की बर्बादी होती है, शिक्षकों को चुनाव कार्य में लगाने से शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होती है। जबकि एक साथ चुनाव होने से देश के जीडीपी में साढ़े चार लाख करोड़ रुपए का योगदान बढ़ेगा।

कहा कि मोदी सरकार राजनीति के अपराधीकरण को रोकने केलिए भी संकल्पित है।जिसपर बोहरा समिति ने भी चिंता व्यक्त की थी।

मोदी सरकार ने कानून बनाकर 30 दिनों के भीतर गंभीर आरोप में गिरफ्तारी के बाद जन प्रतिनिधियों को इस्तीफा देने का प्रावधान किया है।

कहा कि जो भी लोकतंत्र से प्यार करता है वह चुनाव सुधार प्रक्रिया का समर्थन करता है। अब तो इंडी गठबंधन के लोग भी चुनाव सुधार का समर्थन कर रहे। अब ईवीएम से जिन्न निकलना बंद हो गया है। चुनाव परिणाम शीघ्र और पारदर्शी है।

उन्होंने चर्चा के दौरान मतदाता सूची में मोबाइल नंबर जोड़ने का सुझाव दिया। जो मतदान प्रतिशत बढ़ाने में काफी सहायक होगा।

Found this article helpful? Share it:

Share: