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गुरूजी शिबू सोरेन को पद्मभूषण मिलने का JMM ने किया स्वागत, भारत रत्न के हकदार

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Jan 25, 2026 · 9:15 PM
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गुरूजी शिबू सोरेन को पद्मभूषण मिलने का JMM ने किया स्वागत, भारत रत्न के हकदार
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*गुरुजी को पद्म भूषण सम्मान का स्वागत, भारत रत्न की मांग जारी:-

 

रांची: भारत सरकार के द्वारा  दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्मभूषण देने की घोषणा हुई है। इस पर JMM ने प्रतिक्रिया दी है।झारखंड आंदोलन के प्रणेता, अलग झारखंड राज्य निर्माता, पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक नेता समाज सुधारक स्वर्गीय दिशोम गुरु शिबू सोरेन को भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण सम्मान दिए जाने की घोषणा की गई है। केंद्र सरकार ने रविवार को पद्म पुरस्कारों की सूची जारी की, जिसमें लोक कल्याण और सामाजिक योगदान के लिए गुरुजी के नाम की घोषणा की गई।

दिशोम गुरु शिबू सोरेन का जन्म 11 जनवरी, 1944 को रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में हुआ था। किशोरावस्था में ही पिता की हत्या के बाद उनके जीवन ने संघर्ष का मार्ग चुना। महाजनी शोषण, जमीन की लूट और सामाजिक अन्याय के विरुद्ध उन्होंने आंदोलन खड़ा किया और ग्रामीणों को संगठित कर उनके अधिकारों के लिए आवाज बुलंद की। जल, जंगल और जमीन की रक्षा उनके जीवन का केंद्रीय उद्देश्य रहा। नशा मुक्ति, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में उनके प्रयासों ने आदिवासी – मूलवासी समाज को नई दिशा दी।

गुरुजी चार दशकों तक झारखंड आंदोलन का चेहरा रहे। वे तीन बार राज्य के मुख्यमंत्री बने और दुमका से आठ बार सांसद चुने गए। राज्यसभा सदस्य और केंद्र में मंत्री के रूप में भी उन्होंने अपनी भूमिका निभाई। 4 अगस्त 2025 को 81 वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ, लेकिन उनका संघर्ष और विचार आज भी लोगों को प्रेरित करता है।

इस बीच, सत्तारूढ़ झामुमो के महासचिव विनोद पांडेय ने पद्म भूषण सम्मान दिए जाने पर भारत सरकार के निर्णय का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि गुरुजी भारतीय मिट्टी के सच्चे सपूत थे, जिन्होंने हाशिये पर खड़े आदिवासी समाज को देश की मुख्यधारा में आवाज दी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि गुरुजी की जीवन-यात्रा और योगदान को देखते हुए भारत रत्न की मांग आगे भी जारी रहेगी।

उल्लेखनीय है कि झारखंड विधानसभा ने पूर्व में सर्वसम्मति से गुरुजी को भारत रत्न दिए जाने का प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजा था। गुरुजी की विरासत झारखंड ही नहीं, बल्कि देश के सामाजिक न्याय के संघर्षों में एक अमिट अध्याय बनी रहेगी।

दिशोम गुरु आदरणीय शिबू सोरेन जी भारतीय मिट्टी के सच्चे संघर्षी सपूत थे।भारत के जंगल की आवाज को उन्होंने देश के सर्वोच्च सदन में उठाया।उनका जीवन, उनका संघर्ष देश के विभिन्न हिस्सों में हाशिये पर जीवन जीने को मजबूर आदिवासी – मूलवासी समाज को आवाज दिया। मेरी नजर में बाबा भारत के अनमोल रत्न थे, वे भारत रत्न के सच्चे मायनों में हकदार हैं। मुझे नहीं पता भारत के इतिहास में किसी आदिवासी व्यक्ति को यह सम्मान अब तक मिला है ? तो इसका क्या मतलब है ? आदिवासी समाज में कोई नायक नहीं हुए ? नहीं… ऐसा नहीं है … सच्चाई है कि आदिवासी समाज को अब तक मुख्य धारा का हिस्सा ही नहीं माना गया है |

वैसे भारत सरकार ने दिशोम गुरु जी को पद्म भूषण से सम्मानित करने का निर्णय लिया है इसके लिए उन्हें साधुवाद, परन्तु, मैं फिर दोहराऊंगा कि मेरे साथ-साथ दिशोम गुरूजी के करोड़ों समर्थकों की भावना है कि उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया जाय |

 

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