न्यूज डेस्क : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन विभाग के कामकाज की समीक्षा कर रहे हैं। इसी कड़ी में कृषि विभाग की समीक्षा की है। समीक्षा में अल्पवृष्टि को लेकर सरकार की तैयारी पर भाजपा ने सवाल खड़ा किया है।
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता मृत्युंजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्वयं स्वीकार किया है कि राज्य में इस वर्ष सामान्य से कम वर्षा हो रही है तथा सूखे की आशंका को देखते हुए अधिकारियों को योजनाएं बनाने और किसानों को समय पर बीज एवं खाद उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। लेकिन यह सवाल उठता है कि खरीफ सीजन शुरू होने के बाद सरकार को अब इन निर्देशों की याद क्यों आई? यदि सरकार समय रहते तैयारी करती, तो आज किसानों को बीज और खाद के लिए भटकना नहीं पड़ता।
उन्होंने कहा कि कृषि कार्य का सबसे महत्वपूर्ण समय निकलता जा रहा है, जबकि राज्य के अनेक हिस्सों से किसानों को बीज और उर्वरक नहीं मिलने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक स्वयं इस बात का प्रमाण है कि सरकार की तैयारियां समय पर नहीं हो सकीं। कमजोर मानसून की आशंका के बीच यह लापरवाही किसानों की चिंता और बढ़ाने वाली है।
भाजपा प्रवक्ता मृत्युंजय शर्मा ने कहा कि सरकार ने इस वर्ष 18 लाख हेक्टेयर में धान की खेती का लक्ष्य रखा है, लेकिन 15 जुलाई तक केवल 2.36 लाख हेक्टेयर, अर्थात मात्र 13.14 प्रतिशत क्षेत्र में ही धान की बिजाई और रोपाई हो सकी है। पलामू प्रमंडल के जिलों में तो न के बराबर रोपनी हुई है। यह स्थिति केवल कम वर्षा का परिणाम नहीं है, बल्कि समय पर बीज, खाद और अन्य आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने में सरकार की विफलता को भी दर्शाती है।
उन्होंने कहा कि हेमंत सरकार की किसान विरोधी कार्यशैली नई नहीं है। पिछले वर्ष धान खरीद सत्र (2025-26) में भी सरकार किसानों के साथ न्याय नहीं कर सकी। सरकार ने 60 लाख क्विंटल धान खरीद का लक्ष्य रखा था, लेकिन खरीद अवधि समाप्त होने तक केवल करीब 30 लाख क्विंटल, यानी लगभग 50 प्रतिशत धान की ही खरीद हो सकी। हजारों किसानों को अपनी उपज बेचने का अवसर नहीं मिला, भुगतान में देरी हुई और अनेक किसानों को मजबूरी में औने-पौने दाम पर धान बेचना पड़ा। दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार ने उस विफलता से भी कोई सबक नहीं लिया।
भाजपा ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री वास्तव में किसानों की चिंता करते हैं, तो केवल समीक्षा बैठकें और निर्देश पर्याप्त नहीं हैं। सरकार को तत्काल सभी जिलों में बीज और खाद की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करनी चाहिए।सूखे की स्थिति से निपटने के लिए जिला स्तर पर प्रभावी कार्ययोजना लागू करनी चाहिए तथा किसानों को हरसंभव तकनीकी और आर्थिक सहायता उपलब्ध करानी चाहिए। अन्यथा कमजोर मानसून और सरकारी लापरवाही का दोहरा संकट झारखंड के किसानों पर भारी पड़ेगा।
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