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केंद्रीय जांच एजेंसियों को बाहरी बताना बिल्कुल गलत- प्रदीप वर्मा

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Jan 10, 2024 · 9:57 AM
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रांची – झारखंड में केंद्रीय एजेंसियों की सक्रियता सभी को समझ में आती है.यहां पर कई ऐसे मामले हुए हैं जिस कारण से केंद्रीय एजेंसी मसलन प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी सीबीआई या इनकम टैक्स जैसी एजेंसियों ने छापेमारी की है.लोगों को पकड़ा है. चाहे वह धन शोधन यानी मनी लॉन्ड्रिंग का मामला हो या फिर अवैध कमाई का या फिर राष्ट्र के संसाधनों की कथित लूट का.
विभिन्न एजेंसियों का झारखंड में लगातार काम होता रहा है.मई 2022 से ईडी यानी प्रवर्तन निदेशालय छापेमारी कर बड़े-बड़े सूरमाओं को जेलों के अंदर भेजी है.झारखंड में राज्य सरकार को इन सब एजेंसियों के कामकाज से परेशानी महसूस हो रही है. कुछ मामलों को तो राजनीति से प्रेरित बताया जाता रहा है. संथाल परगना में खनिज संसाधनों की लगभग 1250 करोड़ रुपए की तस्करी के मामले में ईडी ने कई लोगों को पकड़ा.सीबीआई भी जांच कर रही है.इस मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी ईडी के समक्ष उपस्थित होकर सवालों का जवाब दे आए हैं.इधर मुख्यमंत्री को लैंडस्कैम में भी सात बार समन किया गया है.पर वह नहीं गए हैं.
मोटे तौर पर यह लग रहा है कि झारखंड में कथित रूप से राजनीतिक इंस्ट्रूमेंट के रूप में केंद्रीय एजेंसियों को भाजपा पर्दे के पीछे से उपयोग में ला रही है तो झारखंड की हेमंत सरकार ने भी ऐसे निर्णय लिए हैं जिससे केंद्रीय एजेंसियों को थोड़ी परेशानी हो सकती है.

-झारखंड सरकार ने क्या लिया है निर्णय-

झारखंड सरकार ने एक बड़ा निर्णय लिया है.अब किसी भी सरकारी अधिकारी, कर्मचारी को केंद्रीय एजेंसियां बुलाएंगी तो उन्हें अपने विभाग से अनुमति लेनी पड़ेगी.संबंधित विभाग के अधिकारी और कर्मचारी अपने विभागीय प्रमुख या प्रधान से अनुमति लेंगे.विभागीय प्रधान इस मामले को मंत्रिमंडल निर्वाचन विभाग को देगा. मंत्रिमंडल निर्वाचन विभाग विधि विभाग से परामर्श के बाद ही उस अधिकारी कर्मचारी को पूछताछ के लिए जाने की इजाजत देगा या फिर नहीं दे सकता है. इस तरह के प्रावधान पश्चिम बंगाल में हैं.

– भाजपा के वरिष्ठ नेता क्या कहते हैं जानिए-

झारखंड की हेमंत सरकार ने मंगलवार को जो निर्णय लिया,उसे भाजपा के नेता गलत मानते हैं. झारखंड बीजेपी के महामंत्री और वरिष्ठ नेता प्रदीप वर्मा ने कहा कि भारत एक संघीय शासन व्यवस्था वाला देश है यह राज्यों का संघ है संघीय शासन व्यवस्था में केंद्रीय एजेंसियों को सभी राज्यों में समान रूप से काम करने का अधिकार होता है.केंद्रीय एजेंसियों का गठन संसद के माध्यम से होता है और इनका अधिकार क्षेत्र पूरा देश होता है.फिर इन एजेंसियों को सरकार के स्तर से बाहरी कहना कदाचित गलत है. कोई भी जांच एजेंसी अगर किसी व्यक्ति को बुलाती है तो इसका अर्थ है कि वह अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रही है जिसका अधिकार उसे संविधान ने या संवैधानिक संस्थाओं ने दिया है.ऐसे में एजेंसियों के कामकाज में विलंब करने की नीयत से राज्य सरकार द्वारा किए गए प्रावधान गलत हैं.

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