रांची: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने संगठन में अनुशासन और महागठबंधन धर्म को लेकर अपनी नीति स्पष्ट कर दी है। पार्टी ने कहा है कि संगठन की मर्यादा, सामूहिक जिम्मेदारी और गठबंधन की एकता से किसी भी स्थिति में समझौता नहीं किया जाएगा।
इसी के तहत प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने पूर्व मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता के. एन. त्रिपाठी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई उनके द्वारा हाल में दिए गए एक सार्वजनिक बयान को लेकर की गई है।
प्रदेश कांग्रेस के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने बताया कि 28 जुलाई 2026 को पलामू में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान के. एन. त्रिपाठी ने कानून-व्यवस्था, पुलिस और गृह विभाग से जुड़े मुद्दों पर कुछ टिप्पणियां की थीं। पार्टी का कहना है कि ये बयान कांग्रेस की निर्धारित नीति और महागठबंधन की सामूहिक जिम्मेदारी के अनुरूप नहीं थे।
राकेश सिन्हा ने कहा कि कांग्रेस लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास करती है और पार्टी के अंदर सभी नेताओं को अपनी बात रखने का अधिकार है। लेकिन किसी भी मतभेद या सुझाव को पार्टी के उचित मंच पर रखना चाहिए। सार्वजनिक मंच से ऐसे बयान देना, जिससे संगठन या गठबंधन की एकता पर असर पड़े, पार्टी स्वीकार नहीं कर सकती।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक अनुशासित राजनीतिक संगठन है, जहां हर नेता और कार्यकर्ता को संगठनात्मक नियमों और जिम्मेदारियों का पालन करना होता है। पार्टी ने के. एन. त्रिपाठी से सात दिनों के भीतर अपना स्पष्टीकरण देने को कहा है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने स्पष्ट किया है कि जवाब मिलने के बाद पार्टी संविधान और अनुशासन प्रक्रिया के अनुसार आगे का निर्णय लिया जाएगा।
कांग्रेस ने दोहराया कि झारखंड में महागठबंधन की मजबूती, संगठन की एकता और जनता के हित पार्टी की सर्वोच्च प्राथमिकता हैं। पार्टी में किसी भी स्तर पर अनुशासनहीनता को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा।


