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अभी तक नियोजन नीति नहीं बना पाई हेमंत सरकार फिर दिख रहा है युवाओं में घुसा

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Sep 16, 2023 · 8:05 PM
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रांची : झारखंड की हेमंत सरकार के लिए एक नियोजन नीति बना पाना एक ऐसा काम है जो आज तक पूरा नहीं हुआ.झारखंडी हित की इस कारण अनदेखी हो रही है.यहां के मूलवासी आदिवासी ठगे जा रहे हैं.जबकि सत्ता पक्ष के लोगों ने कहा था कि मार्च,2023 तक एक फूल प्रूफ नियोजन नीति बनकर तैयार हो जाएगी.लेकिन सितंबर का महीना गुजर रहा है.सरकार की मति- गति कुछ भी स्पष्ट नहीं है.नियोजन नीति कब आएगी इसका कोई संकेत भी फिलहाल नजर नहीं आ रहा है.मालूम हो कि झारखंड में लगभग सभी नियुक्ति प्रक्रिया विवादों में ही रहती हैं, कभी पेपर लीक का मामला सामने आता है, तो कभी नियमावली ही रद्द कर दी जाती है. झारखंड राज्य को बने 23 साल लगभग हो गए हैं. लेकिन आज भी झारखंड के अभ्यर्थी आंदोलन करते हुए नजर आते हैं. अभ्यर्थियों का कहना रहता है कि झारखंड में जब नियोजन नीति और स्थानीय नीति स्पष्ट नहीं है तो आखिर सरकार नियुक्तियां कैसे लेगी.गौरतलब है कि 16 दिसंबर,2022 को झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की बनाई गई नियोजन नीति 2022 को रद्द कर दिया था, नियोजन नीति रद्द होने के बाद कई नियुक्तियां भी रद्द हो गई थी,और झारखंड के सभी जिलों में अभ्यर्थी आंदोलनरत थे. एक बार फिर से बेरोजगार युवाओं का गुस्सा उभर रहा है.उस समय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का एक ऑडियो तेजी से वायरल हुआ था. जिसमें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन झारखंड के अभ्यर्थियों से पूछते हुए नजर आ रहे थे कि आखिर सरकार को किस तरीके की नियोजन नीति बननी चाहिए लेकिन इस ऑडियो के बाद झारखंड के अभ्यर्थी एक बार फिर से आंदोलन करना शुरू कर दिए थे.
मालूम हो कि 16 दिसंबर,2022 को राज्य सरकार की ओर से बनाई गई नियोजन नीति को झारखंड हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया था.उसके बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का एक ऑडियो तेजी से वायरल हो रहा था जिसमें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन झारखंड के अभ्यर्थियों से पूछते हुए नजर आ रहे थे कि आखिर सरकार को किस तरह की नियोजन नीति बननी चाहिए जो हाई कोर्ट में ना फसे. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 2013 का जिक्र किया था जिसके बाद राज्य में 60: 40 की नीति को लेकर विरोध होना शुरू हो गया था, दरअसल 2013 से पहले की नियोजन नीति की बात करेंगे तो 60% झारखंडवासियों के लिए आरक्षित और 40% गैर झारखंड वासियों के लिए आरक्षित थे.

  • 2013 से पहले की जो नीति थी उसमें 60% झारखंडवासियों के लिए आरक्षित था और 40% गैर झारखंडवासियों के लिए आरक्षित था ,लेकिन झारखंड के अभ्यर्थियों का कहना है कि झारखंड झारखंडियों के लिए है और झारखंड में बाहरी लोगों को हम एंट्री नहीं करने देंगे ,लेकिन दूसरी ओर लगातार सरकार की ओर से दावे किए जा रहे हैं कि सरकार ज्यादा से ज्यादा स्थानीय लोगों को नियुक्ति देगी, दरअसल झारखंड मुक्ति मोर्चा की विधायक सीता सोरेन ने भी स्वर्गीय दुर्गा सोरेन की जयंती के दिन एक बयान दिया था जिसमें उन्होंने कहा था कि बाहरियों को भगाना है और स्थानीय को रोजगार देना है.
    बाहरी और भीतरी को लेकर लगातार झारखंड की सियासत तेज हो गई है,लेकिन सरकार की ओर से लगातार दावे किए जा रहे हैं कि सरकार स्थानीय लोगों को रोजगार देगी. बता दें कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन लगातार सभा को संबोधित करते हुए कह रहे हैं कि ज्यादा से ज्यादा नियुक्ति झारखंडवासियों की होगी. सरकार रोजगार का रास्ता साफ करेगी और झारखंड के अभ्यर्थियों को मौका देगी.
    राज्य सरकार लगातार यह दावे करती हुई नजर आ रही थी कि झारखंड राज्य पहला ऐसा राज्य होगा,जहां पर एक साथ 26,000 शिक्षकों की नियुक्ति होगी, लेकिन दूसरी ओर नियुक्ति नियमावली को लेकर लगातार टेट पास पारा शिक्षक आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं, टेट पास पारा शिक्षकों का कहना था कि इस नियुक्ति में उन्हें सीधा समायोजन चाहिए,लेकिन दूसरी ओर हाई कोर्ट ने सहायक अध्यापक नियुक्ति नियमावली पर रोक लगा दी है.नियमावली रद्द होने से सारी नियुक्तियां रद्द चुकी हैं. मीडिया से मुखातिब होते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस मसले पर कहा था कि सरकार सभी मुमकिन कोशिश कर रही है लेकिन कुछ लोग नहीं चाहते हैं कि झारखंड राज्य का भला हो. इसलिए वे लोग हथकंडे अपनाते रहते हैं लेकिन सरकार जो वादा करके आई थी उस वादे को पूरा करेगी.
    झारखंड में लगातार नीतियों को लेकर अभ्यर्थी धरना प्रदर्शन और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की आवास का घेराव करते हुए नजर आते हैं, विधानसभा के बजट सत्र के दौरान अभ्यर्थी विधानसभा का घेराव करने के लिए गए थे कई अभ्यर्थियों के ऊपर लाठी चार्ज की गई,और आसू गैस के गोले दागे गए थे.
    मनोज यादव बताते है कि झारखंड में सरकार बाहरियों को एंट्री देना चाहती है. इस वजह से सरकार इस तरीके की नीतियां बना रही है. सरकार को यह समझने की जरूरत है कि झारखंड के अभ्यर्थी क्या चाहते हैं, वहीं छात्र नेता देवेंद्र महतो ने कहा कि सरकार को अब जल्द ही नियोजन नीति पर स्थिति स्पष्ट करने की जरूरत है.अगर सरकार स्थिति स्पष्ट नहीं करेगी तो अभ्यर्थी आने वाले समय में उग्र आंदोलन भी करेंगे. भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने कई बार कहा है कि झारखंड के मूलवासी और आदिवासी के लिए एक मुकम्मल नियोजन नीति बनाई जाए लेकिन सरकार की नियत ही ठीक नहीं है उन्होंने कहा कि कैसे मुकदमों के लिए मुख्यमंत्री बड़े-बड़े वकीलों को ऊंची फीस देकर बहस करवाते हैं.उन्हें नियोजन नीति बनाने के लिए भी बड़े विधि विशेषज्ञ या वकीलों को इंगेज करना चाहिए.प्रदेश महामंत्री प्रदीप वर्मा का भी कहना है कि हेमंत सरकार झारखंड के युवाओं को ठग रही है.जिन चुनावी वादों के साथ यह सरकार सत्ता पर काबिज हुई थी, वह सब भूल गई. युवाओं को ठग रही है.आने वाले चुनाव में यही युवा सरकार को सबक सिखाएंगे.

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