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क्या Gen Z को गुमराह किया गया था? इस्तीफे के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने पहली बार खोली अपनी बात

@karishma

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Aug 09, 2026 · 12:40 PM
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क्या Gen Z को गुमराह किया गया था? इस्तीफे के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने पहली बार खोली अपनी बात
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बीजेपी नेता और संबलपुर से सांसद धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देने के बाद पहली बार इस पूरे घटनाक्रम पर खुलकर प्रतिक्रिया दी है। ओडिशा के संबलपुर स्थित जीएम यूनिवर्सिटी में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए उन्होंने NEET पेपर लीक विवाद और इसके बाद हुए छात्र आंदोलनों का जिक्र किया। प्रधान ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान Gen Z यानी युवा पीढ़ी को गुमराह करने की कोशिश की गई।

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि युवाओं को लेकर उनके मन में काफी उम्मीदें हैं। उन्होंने कहा कि Gen Z देश के बच्चे हैं और आने वाले समय में यही युवा भारत को आगे ले जाएंगे। उनके मुताबिक, हर साल देश में करोड़ों बच्चे जन्म लेते हैं और पिछले एक दशक में बड़ी संख्या में नई पीढ़ी सामने आई है। उन्होंने कहा कि इन युवाओं की अपनी आकांक्षाएं हैं और उन्हें सही दिशा देना जरूरी है।

‘मेरे लिए पद कभी महत्वपूर्ण नहीं रहा’

अपने इस्तीफे को लेकर प्रधान ने कहा कि उनके लिए मंत्री पद कोई प्राथमिकता नहीं था। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के दौरान उन्होंने केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा देने की पेशकश की थी। इसके बाद 25 जुलाई को उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया।

संबलपुर में एक अन्य कार्यक्रम के दौरान प्रधान ने ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेडी अध्यक्ष नवीन पटनायक पर भी हमला बोला। उन्होंने बीजेडी कार्यकर्ताओं की ओर से किए गए विरोध प्रदर्शन और ‘धर्मेंद्र प्रधान वापस जाओ’ के नारों का जिक्र करते हुए कहा कि वह इससे परेशान नहीं हैं। प्रधान ने खुद को किसान का बेटा बताते हुए कहा कि उन्हें वापस जाने के लिए कहा जाएगा, तब भी वह लोगों के बीच लौटकर आएंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने अपने काम से कभी ओडिशा की प्रतिष्ठा को नुकसान नहीं पहुंचाया। प्रधान के इस बयान पर मौजूद लोगों ने भी प्रतिक्रिया दी।

बीजेडी ने आरोपों पर किया पलटवार

धर्मेंद्र प्रधान के आरोपों पर बीजेडी नेता और संबलपुर के पूर्व मंत्री रोहित पुजारी ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि प्रधान को बदनाम करने की किसी को जरूरत नहीं है। उनके मुताबिक, NEET विवाद और छात्रों के प्रदर्शन से निपटने के तरीके को लेकर बीजेपी नेता की आलोचना हुई थी।

पुजारी ने दावा किया कि छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठे और इसी वजह से प्रधान को विरोध का सामना करना पड़ा। उन्होंने इसके लिए तत्कालीन शिक्षा मंत्रालय की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए।

इस बीच, धर्मेंद्र प्रधान के कार्यक्रम को लेकर संभावित विरोध को देखते हुए संबलपुर में पुलिस ने एहतियात के तौर पर बीजेडी के कुछ कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। पूरे घटनाक्रम के बीच धर्मेंद्र प्रधान के बयान और बीजेडी के पलटवार ने ओडिशा की सियासत में NEET विवाद को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

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