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International Tiger Day 2026: भारत में बाघों की बढ़ती संख्या बनी दुनिया के लिए मिसाल, जानिए क्यों खास है टाइगर डे

KARISHMA SANCHAY

KARISHMA SANCHAY

Jul 29, 2026 · 5:07 PM
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International Tiger Day 2026: भारत में बाघों की बढ़ती संख्या बनी दुनिया के लिए मिसाल, जानिए क्यों खास है टाइगर डे
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हर साल 29 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय टाइगर दिवस (International Tiger Day) मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य दुनिया भर में बाघों के संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना और उनके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने का संदेश देना है। बाघ केवल भारत का राष्ट्रीय पशु ही नहीं, बल्कि जंगलों की सेहत और जैव विविधता का सबसे बड़ा प्रतीक भी माना जाता है। आज भारत दुनिया में सबसे अधिक बाघों वाला देश बन चुका है। हाल के सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में बाघों की संख्या 3,682 तक पहुंच गई है, जो दुनिया की कुल जंगली बाघ आबादी का लगभग 75 प्रतिशत है। यह उपलब्धि वन संरक्षण, टाइगर रिजर्व और स्थानीय समुदायों की भागीदारी का परिणाम मानी जाती है।

भारत में कहां पाए जाते हैं सबसे ज्यादा बाघ?

देश के कई राज्यों में बाघों की अच्छी संख्या दर्ज की गई है। मध्य प्रदेश को “टाइगर स्टेट” कहा जाता है क्योंकि यहां सबसे अधिक बाघ पाए जाते हैं। इसके अलावा कर्नाटक, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, असम, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और केरल भी बाघों के प्रमुख आवास हैं। भारत में वर्तमान समय में 58 टाइगर रिजर्व हैं, जहां बाघों और अन्य वन्यजीवों के संरक्षण के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। कॉर्बेट, रणथंभौर, कान्हा, बांधवगढ़, सुंदरबन, काजीरंगा और पेंच जैसे राष्ट्रीय उद्यान दुनियाभर के पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।

टाइगर डे क्यों मनाया जाता है?

अंतरराष्ट्रीय टाइगर दिवस की शुरुआत वर्ष 2010 में रूस के सेंट पीटर्सबर्ग में आयोजित ग्लोबल टाइगर समिट के दौरान हुई थी। उस समय दुनिया में बाघों की घटती संख्या चिंता का विषय बन चुकी थी। इसके बाद कई देशों ने मिलकर बाघों के संरक्षण का संकल्प लिया और हर साल 29 जुलाई को टाइगर डे मनाने का फैसला किया गया।

बाघों के सामने आज भी हैं कई चुनौतियां

हालांकि भारत में बाघों की संख्या बढ़ी है, लेकिन उनके सामने कई खतरे अब भी मौजूद हैं। जंगलों का लगातार कम होना, अवैध शिकार, मानव-वन्यजीव संघर्ष और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याएं बाघों के भविष्य के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जंगल सुरक्षित रहेंगे तो बाघ भी सुरक्षित रहेंगे। बाघों का संरक्षण केवल एक प्रजाति को बचाने का प्रयास नहीं, बल्कि पूरे जंगल और वहां रहने वाले हजारों जीवों के अस्तित्व की रक्षा करना है।

हर नागरिक की भी है जिम्मेदारी

वन्यजीव संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। पर्यावरण की रक्षा, जंगलों का संरक्षण और वन्यजीवों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाकर हर व्यक्ति इस अभियान का हिस्सा बन सकता है। अंतरराष्ट्रीय टाइगर दिवस हमें यह याद दिलाता है कि यदि बाघ सुरक्षित रहेंगे तो जंगल सुरक्षित रहेंगे, और जब जंगल सुरक्षित होंगे तभी आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ पर्यावरण और समृद्ध जैव विविधता मिल सकेगी।

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