
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को IIT दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में हिस्सा लिया। कार्यक्रम में उन्होंने डिग्री हासिल करने वाले 3000 से अधिक छात्रों को संबोधित किया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने छात्रों को उनके शैक्षणिक सफर के महत्वपूर्ण पड़ाव पर बधाई दी और कहा कि वे अपने जीवन के बेहद खास और यादगार दौर से गुजर रहे हैं।
दीक्षांत समारोह में बड़ी संख्या में छात्र, शिक्षक, शोधकर्ता और उनके परिवार के सदस्य मौजूद रहे। इस बैच में 587 PhD स्कॉलर्स भी शामिल हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में छात्रों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि इस मुकाम तक पहुंचना उनके लिए गर्व का विषय है।
PM मोदी ने छात्रों से कहा कि दीक्षांत समारोह का यह अवसर उनके जीवन में लंबे समय तक याद रहेगा। उन्होंने कहा कि छात्रों के मन में इस समय भविष्य को लेकर कई तरह के विचार और योजनाएं चल रही होंगी। कोई आगे की पढ़ाई के बारे में सोच रहा होगा, तो कोई नौकरी, रिसर्च या अपना स्टार्टअप शुरू करने की तैयारी कर रहा होगा।
प्रधानमंत्री ने IIT दिल्ली के छात्रों के साथ अपने पिछले जुड़ाव का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इससे पहले वह संस्थान के एक कार्यक्रम से वर्चुअल माध्यम से जुड़े थे। वह दौर कोरोना महामारी का था, जब प्रत्यक्ष रूप से छात्रों के बीच पहुंचना संभव नहीं था। ऐसे में इस बार छात्रों के सामने मौजूद होकर उनसे बातचीत करना उनके लिए विशेष अनुभव रहा।
अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने हल्के-फुल्के अंदाज में छात्रों से कहा कि इस समय उनके मन में बहुत सारे सवाल और विचार चल रहे होंगे। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि वे बाबा बागेश्वर तो नहीं हैं, लेकिन छात्रों के मन में चल रही कई बातों का अंदाजा लगाया जा सकता है। इस टिप्पणी पर समारोह में मौजूद लोगों के बीच माहौल हल्का और उत्साहपूर्ण हो गया।
IIT दिल्ली देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों में शामिल है और यहां से पढ़ाई पूरी करने वाले छात्र देश-विदेश में तकनीक, रिसर्च, उद्योग और स्टार्टअप के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री का यह संबोधन छात्रों के लिए खास महत्व रखता है।
कार्यक्रम में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान समेत कई गणमान्य लोग भी मौजूद रहे। दीक्षांत समारोह के दौरान छात्रों को उनकी डिग्री और उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया। समारोह में छात्रों के साथ उनके परिवारों के लिए भी यह भावनात्मक और गर्व का अवसर रहा।

