बिहार की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को बिहार विधान परिषद (MLC) का सदस्य बनाने की तैयारी तेज हो गई है। इसके लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधान परिषद सदस्य देवेश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे के बाद खाली होने वाली सीट पर दीपक प्रकाश को भेजे जाने की संभावना जताई जा रही है।
दीपक प्रकाश के मंत्री पद को लेकर पिछले कुछ समय से संवैधानिक सवाल उठ रहे थे। दरअसल, मंत्री बनने के बाद भी वह विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं बन पाए थे। संविधान के अनुच्छेद 164(4) के अनुसार, कोई भी व्यक्ति बिना किसी सदन का सदस्य बने अधिकतम छह महीने तक ही मंत्री रह सकता है। इसी मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका भी दायर की गई थी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार से पूछा कि छह महीने की निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद भी दीपक प्रकाश मंत्री पद पर कैसे बने हुए हैं। इस मामले में सरकार से जवाब भी मांगा गया था। सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई से पहले एनडीए ने राजनीतिक और संवैधानिक दोनों पहलुओं को ध्यान में रखते हुए समाधान का रास्ता तैयार कर लिया।
भाजपा नेता देवेश कुमार के इस्तीफे के बाद अब दीपक प्रकाश को विधान परिषद का सदस्य बनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। यदि वह एमएलसी निर्वाचित हो जाते हैं, तो उनके मंत्री पद पर बने रहने को लेकर उठ रहे संवैधानिक विवाद स्वतः समाप्त हो जाएगा।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि एनडीए का यह कदम केवल एक राजनीतिक रणनीति नहीं, बल्कि संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप स्थिति को स्पष्ट करने का प्रयास भी है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि रिक्त हुई विधान परिषद सीट पर चुनाव की प्रक्रिया कब पूरी होती है और दीपक प्रकाश आधिकारिक रूप से सदन के सदस्य कब बनते हैं।

