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कानूनी तरीके से विरोध करना गलत नहीं, छात्रों के मामले में SC ने BCI को भेजा नोटिस

@karishma

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Aug 14, 2026 · 1:45 PM
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कानूनी तरीके से विरोध करना गलत नहीं, छात्रों के मामले में SC ने BCI को भेजा नोटिस
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 NALSAR यूनिवर्सिटी के छात्रों से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामला छात्रों के उस विरोध से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को बुलाए जाने पर आपत्ति जताई थी।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि अगर छात्र कानून के दायरे में रहकर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं, तो BCI को इसमें दखल नहीं देना चाहिए। CJI ने यह भी कहा कि छात्रों को अपनी बात रखने और अपनी आवाज उठाने की आजादी होनी चाहिए।

CJI सूर्यकांत ने कहा कि इस मामले में BCI का कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने बताया कि छात्रों ने उन्हें पत्र लिखा था और यह उनके तथा छात्रों के बीच संवाद का विषय है। उन्होंने सवाल उठाया कि छात्रों के खिलाफ इस तरह का सर्कुलर जारी करने का अधिकार BCI को किस आधार पर है।

CJI ने अपने छात्र जीवन का जिक्र करते हुए कहा कि वह भी कॉलेज के दिनों में छात्र गतिविधियों में सक्रिय रहे थे। उनके मुताबिक, छात्र अगर किसी बात का विरोध कर रहे हैं और उनका तरीका कानूनी है, तो उन्हें अपनी बात रखने की अनुमति मिलनी चाहिए, भले ही उनकी बात से कोई सहमत हो या नहीं।

छात्रों के नामांकन पर रोक का था विवाद

दरअसल, कुछ NALSAR छात्रों ने दीक्षांत समारोह में CJI को मुख्य अतिथि बनाए जाने का विरोध किया था। बताया गया कि छात्रों की नाराजगी युवाओं को लेकर CJI की एक टिप्पणी से जुड़ी थी। विरोध के दौरान कुछ छात्रों ने CJI से अपनी डिग्री नहीं लेने की बात भी कही थी।

इसके बाद BCI ने एक सर्कुलर जारी कर छात्रों के एनरोलमेंट पर रोक लगाने और कार्रवाई की बात कही थी। हालांकि, बाद में BCI के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने स्पष्ट किया कि परिषद ने अपना पिछला आदेश वापस ले लिया है और छात्रों के खिलाफ कोई जांच नहीं की जाएगी।

वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने भी छात्रों के खिलाफ जारी कार्रवाई के आदेश को अवैध बताया। उन्होंने कहा कि किसी नियामक संस्था को पहले यह देखना चाहिए कि उसके पास ऐसा आदेश जारी करने का अधिकार है या नहीं। उनके मुताबिक, BCI के पास किसी खास बैच के छात्रों के नामांकन पर रोक लगाने जैसा व्यापक आदेश जारी करने का प्रावधान नहीं है।

BCI ने बाद में कहा कि उसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि कानून के छात्रों को न्यायिक इंटर्नशिप के दौरान किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद अब इस मामले में BCI को अपना जवाब देना होगा।

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