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धरती आबा को समर्पित भव्य जतरा को मंत्री ने रवाना किया

Rajesh Kumar

Rajesh Kumar

Aug 09, 2026 · 1:28 PM
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धरती आबा को समर्पित भव्य जतरा को मंत्री ने रवाना किया
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रांची: झारखंड में अंतरराष्ट्रीय आदिवासी दिवस मनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार आदिवासी दिवस को बड़े स्तर पर मनाती है। समझा जाता है कि पूरे देश में इतना भव्य समारोह अन्यत्र नहीं मनाया जाता है। रांची में इसका आयोजन सरकार पूरे उत्साह से करती है। दो दिन का आयोजन आज से शुरू है। झारखंड आदिवासी महोत्सव मनाया जा रहा है।

भगवान बिरसा मुंडा की विरासत को समर्पित भव्य जतरा को माननीय मंत्री चमरा लिंडा ने हरी झंडी दिखाकर रवाना। किया।झारखण्ड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति और वीर शहीद भगवान बिरसा मुंडा की अमर विरासत को जीवंत रखने वाले एक भव्य आयोजन का आज शुभारंभ हुआ। अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग झारखण्ड सरकार के माननीय मंत्री श्री चमरा लिंडा ने भगवान बिरसा मुंडा स्मृति पार्क (बिरसा मुंडा कारागृह) जेल मोड़ से भगवान बिरसा मुंडा जतरा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

इस दौरान प्रधान सचिव, अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग कृपानन्द झा, आदिवासी कल्याण आयुक्त कुलदीप चौधरी, विशेष सचिव सह निदेशक सूचना जन संपर्क विभाग,  राजीव लोचन बक्शी पदाधिकारी, परियोजना निदेशक ITDA रांची, मनीषा तिर्की, जिला जन संपर्क पदाधिकारी रांची  उर्वशी पांडेय एवं सम्बंधित पदाधिकारी उपस्थित थे।

यह ऐतिहासिक जतरा भगवान बिरसा मुंडा स्मृति पार्क (बिरसा मुंडा कारागृह) जेल मोड़ से प्रारंभ होकर करम टोली चौक होते हुए एसएसपी आवास से होते हुए मोरहाबादी पहुँचेगी। पूरे मार्ग में जनजातीय संस्कृति की अनुपम झलक देखने को मिलेगी।

जतरा में झारखण्ड के सभी जिलों से लगभग 10 हजार कलाकार शामिल हुए हैं। ये कलाकार राज्य की विभिन्न जनजातियों—संथाल, मुंडा, हो, उरांव, खड़िया, खरवार और अन्य—से संबंधित हैं। उन्होंने अपने-अपने पारंपरिक स्थानीय वेश-भूषा, आभूषण और वाद्ययंत्रों (ढोल, नगाड़ा, मांदर, बाँसुरी आदि) से सुसज्जित होकर इस भव्य आयोजन में भाग लिया है। जतरा में कुल 6 आकर्षक झाँकियों का भी प्रदर्शन किया गया, जिनमें भगवान बिरसा मुंडा के जीवन, संघर्ष और आदिवासी संस्कृति के विभिन्न पहलुओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया।

यह जतरा केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भगवान बिरसा मुंडा के त्याग, बलिदान और आदिवासी अस्मिता के संरक्षण का प्रतीक है। इसमें शामिल कलाकारों की विशाल संख्या और विविध जनजातीय प्रतिनिधित्व झारखण्ड की सांस्कृतिक एकता और गौरव को प्रदर्शित करता है।

माननीय मंत्री श्री चमरा लिंडा ने इस अवसर पर सभी कलाकारों, आयोजकों और प्रतिभागियों को हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन आदिवासी युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं और झारखण्ड की समृद्ध विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। मंत्री महोदय ने जतरा की सफलता की कामना करते हुए सभी प्रतिभागियों को प्रोत्साहित किया।

इस भव्य आयोजन में बड़ी संख्या में आम नागरिक, संस्कृति प्रेमी और अधिकारीगण भी उपस्थित रहे, जिन्होंने कलाकारों के उत्साहपूर्ण प्रदर्शन की भरपूर सराहना की।

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