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कैंसर की दवा की कीमतों में भारी कमी। विदेशी दवाओं पर इसका लाभ नहीं।

Rajesh Kumar

Rajesh Kumar

Oct 29, 2026 · 7:59 AM
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कैंसर की दवा की कीमतों में भारी कमी। विदेशी दवाओं पर इसका लाभ नहीं।
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न्यूज डेस्क : यह बहुत बड़ी ख़बर है। कोर्ट की सख़्ती के बाद दवाओं की कीमत में भारी कमी होने जा रही है।9 नवंबर से नई रेट लागू होंगी।

हम बता दें कि दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करने वाली संस्था राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) के निर्देश के बाद दवा कंपनियों ने कैंसर दवाओं के 543 फार्मुलेशन के दाम घटा दिए हैं। ट्रेड मार्जिन रैशनलाइजेशन (टीएमआर) ढांचे के तहत की गई इस कटौती में कुछ दवाओं की कीमतों में 90 प्रतिशत से भी अधिक की कमी आई है।

इससे मरीज और उनके परिजनों को बड़ी राहत मिलेगी।संशोधित अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) नौ नवंबर से लागू होंगे। इससे देशभर के कैंसर मरीजों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।एनपीपीए के निर्देश पर 137 कैंसर दवाओं के 543 फार्मुलेशन की एमआरपी फिर से निर्धारित की गई है। इन दवाओं के लिए सरकार की ओर से पहले कोई अधिकतम मूल्य सीमा तय नहीं थी। रुपयों के हिसाब से सबसे बड़ी कटौती थियोटेपा में हुई है। जानकारी के अनुसार पाल्बोप्रो 125 एमजी के 21 कैप्सूल वाले पैक की कीमत 93.3 प्रतिशत घटकर ₹40,421.33 से ₹2,720 हो गई है। एनपीपीए का अनुमान है कि मरीजों के अपनी जेब से होने वाले खर्च में सालाना ₹2,500 करोड़ से ₹3,500 करोड़ की बचत होगी।यह आदेश ऐसे समय में आया है जब सुप्रीम कोर्ट दवाओं की कीमतों पर व्यापक नियंत्रण लगाने पर विचार कर रहा है। दवाओं की कीमतों में कमी के बीच विचार करने वाली अहम बात यह है कि जांच, दवा देने की फीस और अन्य विविध शुल्कों को देखते हुए क्या अस्पतालों में इलाज का खर्च भी घटेगा।

लेकिन यहां पर यह भी बताना जरूरी है कि विदेश से आने वली पेटेंटेड दवा के दाम में कोई कमी नहीं होने वाली है। बहुत सारे लोगों का कहना है कि इन विदेशी दवाओं पर भी भारत सरकार पहल करे। एक दवा Tagrisso है जिसकी कीमत 140000 रुपए (10 टैबलेट्स) , इसके लिए भी पहल करनी चाहिए। या तो सरकार इसपर सब्सिडी दे या फिर इस कंपनी के प्रतिनिधि से बात करे।

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