शिक्षा व्यवस्था में सुधार और नीट पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर पिछले 26 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने आखिरकार अपना अनशन समाप्त कर दिया। देर रात केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों के साथ हुई बातचीत के बाद यह फैसला सामने आया। सरकार की ओर से कुछ महत्वपूर्ण आश्वासन दिए जाने के बाद वांगचुक ने अपने समर्थकों और परिवार की मौजूदगी में अनशन तोड़ने का निर्णय लिया जानकारी के अनुसार, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने अस्पताल पहुंचकर वांगचुक से मुलाकात की। इस दौरान उन्हें सरकार की ओर से लिखित भरोसा भी सौंपा गया। बातचीत में शिक्षा सुधार, परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर संसद में व्यापक चर्चा कराने का आश्वासन दिया गया। साथ ही प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई न करने के संकेत भी दिए गए। सोनम वांगचुक ने कहा कि उन्होंने यह फैसला देश के व्यापक हित और सकारात्मक संवाद की उम्मीद को ध्यान में रखते हुए लिया है। उनका मानना है कि यदि सरकार अपनी प्रतिबद्धताओं पर गंभीरता से काम करती है तो शिक्षा व्यवस्था में जरूरी बदलाव संभव हैं। उन्होंने अपने समर्थकों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने और किसी भी तरह के टकराव से बचने की अपील भी की। हालांकि, आंदोलन से जुड़े कुछ संगठनों ने स्पष्ट किया है कि उनकी मांगें अभी पूरी तरह पूरी नहीं हुई हैं। उनका कहना है कि जब तक शिक्षा व्यवस्था में ठोस सुधार नहीं किए जाते और जिम्मेदारी तय नहीं होती, तब तक शांतिपूर्ण विरोध जारी रहेगा। आंदोलनकारी मानते हैं कि केवल आश्वासन ही पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि उन्हें जमीन पर लागू होते देखना भी उतना ही जरूरी है। सोनम वांगचुक का अनशन समाप्त होने से फिलहाल गतिरोध में नरमी आई है, लेकिन शिक्षा सुधार और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस अभी भी जारी रहने की संभावना है।


