
संसद के मानसून सत्र में सोमवार को पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 लोकसभा में पेश किया गया। सरकार का कहना है कि इस संशोधन का उद्देश्य देशभर में होने वाली सार्वजनिक परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और निष्पक्ष बनाना है, ताकि पेपर लीक और परीक्षा में होने वाली गड़बड़ियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। हालांकि, विधेयक पेश होने के दौरान विपक्ष के तीखे विरोध और नारेबाजी के कारण सदन की कार्यवाही बाधित हुई और लोकसभा तथा राज्यसभा की बैठक दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में विधेयक पेश करते हुए कहा कि सरकार परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए लगातार सुधार कर रही है। वहीं, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि छात्रों के भविष्य से जुड़े इस महत्वपूर्ण विषय पर हंगामे की बजाय गंभीर चर्चा होनी चाहिए। उनके अनुसार, प्रस्तावित संशोधन भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं में शामिल दोषियों के खिलाफ त्वरित और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम है। दूसरी ओर, विपक्ष ने NEET परीक्षा विवाद और छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार को घेरना जारी रखा। विपक्षी नेताओं ने संसद परिसर में प्रदर्शन किया और मामले पर विस्तृत चर्चा तथा जवाबदेही की मांग की। कई सांसदों ने आरोप लगाया कि छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग किया गया, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। संसद में परीक्षा सुधारों को लेकर गठित नई टास्क फोर्स, कानून में प्रस्तावित बदलाव और छात्रों के अधिकारों को लेकर भी व्यापक बहस देखने को मिली। सरकार का दावा है कि नए प्रावधानों से परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही बढ़ेगी और प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता मजबूत होगी, जबकि विपक्ष चाहता है कि विधेयक के हर प्रावधान पर विस्तृत चर्चा के बाद ही इसे अंतिम रूप दिया जाए। अब सभी की निगाहें संसद में होने वाली आगामी बहस पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने के लिए प्रस्तावित कानून में क्या अंतिम बदलाव किए जाते हैं।

