झारखंड में चर्चित JPSC परीक्षा अनियमितता मामले की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। इस बीच रांची और उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से पांच और आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ जांच को नई दिशा मिली है। झारखंड पुलिस और उत्तर प्रदेश पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में हुई इन गिरफ्तारियों को मामले की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। जांच एजेंसी का कहना है कि डिजिटल साक्ष्य भी बरामद किए गए हैं, जिनकी फॉरेंसिक जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सीआईडी के अनुसार, यह कार्रवाई कांड संख्या 16/2026 के तहत की गई है। गिरफ्तार किए गए लोगों में TDPL से जुड़ा एक कर्मचारी भी शामिल है। इसके अलावा अन्य आरोपियों पर भी परीक्षा प्रक्रिया में कथित रूप से धोखाधड़ी करने और अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने के आरोप हैं।
जांच एजेंसी ने बताया कि छापेमारी के दौरान कई डिजिटल डिवाइस, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए हैं। इन साक्ष्यों की तकनीकी जांच के बाद यह पता लगाया जाएगा कि परीक्षा में कथित अनियमितता का नेटवर्क कितना बड़ा था और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।
CID का कहना है कि जांच अभी जारी है और हर पहलू की गहराई से पड़ताल की जा रही है। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि केवल साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच के दौरान अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
JPSC परीक्षा विवाद को लेकर पहले से ही राज्यभर में राजनीतिक और सामाजिक बहस जारी है। छात्र संगठन लगातार निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। हाल के दिनों में इस मामले में कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, जिससे यह संकेत मिल रहा है कि जांच एजेंसियां कथित परीक्षा घोटाले की हर परत तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल साक्ष्य इस जांच में अहम भूमिका निभा सकते हैं। मोबाइल फोन, लैपटॉप, चैट रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डेटा से यह स्पष्ट हो सकता है कि कथित तौर पर परीक्षा में अनियमितता कैसे की गई और इसमें किन लोगों का नेटवर्क सक्रिय था।
फिलहाल, CID की कार्रवाई जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में JPSC परीक्षा अनियमितता मामले की जांच पर पूरे झारखंड की नजर बनी हुई है।

