झारखंड के चर्चित गैंगस्टरों में शामिल सुजीत सिन्हा की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं मानी जाती। कभी पलामू का एक स्थानीय अपराधी रहा सुजीत समय के साथ राज्य के सबसे प्रभावशाली गैंगस्टरों में गिना जाने लगा। रविवार देर रात जामताड़ा में पुलिस मुठभेड़ में उसकी मौत के बाद एक ऐसे अपराधी का अध्याय समाप्त हो गया, जिसका नाम वर्षों तक रंगदारी, हत्या और संगठित अपराध की घटनाओं के साथ जुड़ता रहा।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, सुजीत सिन्हा के खिलाफ हत्या, अपहरण, रंगदारी, आर्म्स एक्ट और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर मामलों सहित 60 से अधिक मुकदमे दर्ज थे। उसका अपराध केवल एक जिले तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पलामू, लातेहार, रांची, धनबाद, हजारीबाग, चतरा और रामगढ़ समेत कई जिलों तक उसका नेटवर्क फैल चुका था।
बताया जाता है कि वर्ष 2006 के आसपास वह पहली बार एक फायरिंग मामले में जेल पहुंचा। जेल से बाहर आने के बाद 2007 में हुए चर्चित दोहरे हत्याकांड ने उसे अपराध की दुनिया में बड़ा नाम दिला दिया। इसी मामले में उसे उम्रकैद की सजा हुई, लेकिन जेल की सलाखें भी उसके बढ़ते नेटवर्क को रोक नहीं सकीं।
जांच एजेंसियों के अनुसार, जेल में बंद रहने के बावजूद सुजीत अपने गिरोह का संचालन करता रहा। आरोप है कि उसके इशारों पर रंगदारी की वसूली, धमकी और कई आपराधिक गतिविधियां संचालित होती थीं। खासतौर पर कोयला कारोबार, ट्रांसपोर्ट, ठेकेदारी और बड़े व्यापारियों से अवैध वसूली उसके नेटवर्क की आय का प्रमुख जरिया मानी जाती थी।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया था कि उसका नाम कुख्यात अपराधी प्रिंस खान के गैंग के साथ भी जोड़ा गया। जांच एजेंसियों ने दोनों गिरोहों के बीच कथित तालमेल और अवैध हथियारों की सप्लाई से जुड़े पहलुओं की भी जांच की थी। हालांकि इन आरोपों की जांच अलग-अलग स्तर पर चलती रही।
सुजीत सिन्हा कई बार जेल के भीतर से कथित तौर पर गिरोह चलाने और जेल नियमों के उल्लंघन के आरोपों को लेकर भी सुर्खियों में रहा। इसी कारण समय-समय पर उसे अलग-अलग जेलों में स्थानांतरित किया गया। सुरक्षा कारणों से हाल ही में उसे एक जेल से दूसरी जेल ले जाया जा रहा था।
इसी दौरान जामताड़ा में पुलिस के अनुसार, उसने भागने की कोशिश की और पुलिसकर्मी का हथियार छीनने का प्रयास किया। जवाबी कार्रवाई में हुई मुठभेड़ में उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद पुलिस अब उसके पूरे नेटवर्क, सहयोगियों और आर्थिक स्रोतों की जांच तेज कर रही है।
सुजीत सिन्हा की मौत के साथ एक बड़ा अपराधी अध्याय जरूर खत्म हुआ है, लेकिन जांच एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती उसके पूरे नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करना और उससे जुड़े सभी लोगों तक पहुंचना है।

