न्यूज डेस्क : अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर महिलाओं के सम्मान, अधिकार और समानता को लेकर चर्चा होती है।आज महिलाएं कहीं से भी कम नहीं हैं। महिला से संसार चलता है।वह जननी है। सूरदास ने कहा था कि जननी घर की धुरी है जिसके इर्द-गिर्द परिवार होता है। भारत में महिला अधिकार की बात होती रही है।हर स्तर पर उन्हें अधिकार, सम्मान और सहभागिता मिले हैं। चलिए आगे जानते हैं।
International Women’s Day (अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस) हर साल 8 मार्च को मनाया जाता है। यह दिन महिलाओं के अधिकार, सम्मान, समानता और उनकी उपलब्धियों को सम्मान देने के लिए समर्पित है। 
इसकी शुरुआत 1908 में न्यूयॉर्क में महिला मजदूरों के आंदोलन से मानी जाती है।
साल 1910 में कोपेनहेगन में आयोजित सम्मेलन में Clara Zetkin ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा।
1975 में United Nations ने इसे आधिकारिक रूप से मनाना शुरू किया।
महिलाओं को समान अधिकार और अवसर दिलाना
समाज में महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना
शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सुरक्षा के मुद्दों पर जागरूकता फैलाना।
आज भारत की राष्ट्रपति महिला हैं। सेना में भी महिलाओं की भूमिका बढ़ी है। आपरेशन सिंदूर के वक्त भी हमने देखा है।अब तो चुनावी राजनीति में भी उनकी भूमिका बढ़ी है। तैंतीस प्रतिशत आरक्षण मिल गया है।
यह दिन महिलाओं के संघर्ष, उपलब्धियों और उनके अधिकारों के सम्मान का दिन है।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुभकामना दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस मौके पर महिलाओं को ढेर सारी शुभकामनाएं दी हैं। झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर सभी महिलाओं को शुभकामना दी है।
झारखंड भाजपा के अध्यक्ष आदित्य प्रसाद साहू, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, प्रदेश महामंत्री और राज्यसभा सदस्य प्रदीप कुमार वर्मा ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर सभी महिलाओं को शुभकामना दी है। उन्होंने कहा कि महिलाओं का सम्मान हमारी पुरातन और सनातन संस्कृति का सम्मान है। केंद्र की मोदी सरकार महिला के सम्मान, सहभागिता और अधिकार के लिए उल्लेखनीय काम की है और कर रही है।
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