न्यूज डेस्क : बिहार की धरती से देश की राजनीति आगे बढ़ती है। मौर्य साम्राज्य का यह केंद्र रहा है। समृद्ध संस्कृति का धनी यह राज्य मानव संसाधन के मामले में अव्वल रहा है। यहां से शिक्षा का अलख ना सिर्फ देश में बल्कि विदेशों में जला है। यह धरती गवाह है विक्रमशिला की शिक्षा व्यवस्था की। नालंदा विश्वविद्यालय की महक तो आज भी आती है। यह धरती वैशाली के गणराज्य प्रणाली का उदाहरण है। बिहार बुद्ध और महावीर की धरती है। यह कहना है झारखंड भाजपा के वरिष्ठ नेता, उपाध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य प्रदीप वर्मा का।
उन्होंने कहा कि यह शांति प्राप्त
करने का अद्भुत स्थल है।यह मोक्ष प्राप्त करने का धाम है। यह सनातन का गढ़ है। यहां के दानवीर कर्ण को कौन नहीं जानता। यहां तो गंगा भी है जो पाप को भी धो डालती है। इसलिए यह बिहार एक भौगोलिक रूप से देश का राज्य नहीं बल्कि राजनीति की पाठशाला है। इस राज्य को जहां गर्व है अपने प्राचीन इतिहास और व्यवस्था पर,तो इसे इस बात का जरूर गुरूर होगा कि उसके पास नीतीश हैं।आज की तारीख में नीतीश कुमार दो दशक का शासन पूरा कर एक तरह से सत्ता का मोह त्याग कर संत परंपरा की राह चुने हैं। ऐसा उदाहरण अन्यत्र नहीं मिल सकता है।
प्रदीप वर्मा ने यह भी कहा कि बिहार ही नहीं बल्कि देश में ऐसा कोई दूसरा राजनेता नहीं होगा जो नीतीश कुमार के इस व्यवहार की तारीफ नहीं करे। नीति और सिद्धांत के पक्के नीतीश समाजवादी विचारधारा को अंगीकार सही मायने में किया। समाज के हर वर्ग का ख्याल रखा। आज सत्ता की कुर्सी का ऐसा त्याग कोई संत प्रवृत्ति वाला ही कर सकता है। आज सत्ता परिवर्तन नहीं बल्कि युग परिवर्तन हुआ है। साल 2005 से नीतीश कुमार शासन में रहे। दो दशक के शासनकाल में उनके बिहार का गौरव लौटने का काम किया जंगल के हिंसक जीव को पिंजड़े में बंद किया। उनके नख कुतर दिए। इसमें भाजपा ने पूरा साथ दिया ।वे NDA के साथ रहे। कुछ समय के लिए भले इधर उधर गए, पर उन्हें बीजेपी का साथ ही अच्छा लगा। यही नीतीश कुमार की सफलता का एक बड़ा राज है।

उन्होंने आगे कहा कि आज सम्राट चौधरी उनके उत्तराधिकारी बने हैं। भाजपा को सरकार का नेतृत्व मिला है। नीतीश कुमार के मार्गदर्शन में बिहार और आगे बढ़ेगा। भाजपा और जेडीयू रेलवे ट्रैक के समान है। विकास की गाड़ी इस पर दौड़ी है और दौड़ेगी। इसमें कोई शक नहीं। नीतीश कुमार के सुशासन की पाठशाला चलती रहेगी। बिहारियों को गर्व होता रहेगा। नीतीश कुमार सिर्फ बिहार के लिए जीते थे और बिहार उन्हें पसंद करता था। विज़न तो लाज़वाब था। आगे भी रहेगा।
बिहार को बीमारू राज्य से विकासशील राज्य बनाने में नीतीश कुमार का बड़ा हाथ है। इसमें भाजपा का साथ बिना शर्त रहा है। आज भी नीतीश कुमार हैं और बिहार के लिए हमेशा रहेंगे। यह भले सत्ता के चेहरे का परिवर्तन माना जाएगा पर NDA ही तो है। बिहार और आगे बढ़ेगा। भाजपा की सर्वस्पर्शी नीति सुशासन का आधार है। सम्राट चौधरी 24 कैरेट के सरकार के नेतृत्वकर्ता साबित होंगे। संगठन का अनुभव और सरकार चलाने का हुनर दोनों थोक मात्रा में है।
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