*देश के दुश्मनों को जब तक मरूंगा नहीं तब तक कहीं नहीं जाऊंगा,
पाकिस्तानी सेना को धूल चटाने वाले रिटायर्ड फौजी राम कठिन पाण्डेय ने ली अंतिम सांस*

रांची : आज एक ऐसे देशभक्त ने अंतिम सांस ली जिसके सामने मौत कई बार आई और सजदा करके चली गई। भारतीय सेना की शानदार सेवा के बाद सेवानिवृत्त फ़ौजी रिटायर्ड हुए। हम बात कर रहे हैं एक ऐसे रिटायर्ड फौजी की, जो बहादुरी के प्रतीक थे। भारत-पाकिस्तान युद्ध में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेने वाले उस सैनिक या फौजी के बारे में हम बता रहे हैं, जिन्होंने आज अंतिम सांस ली है। दुश्मनों को जंग में मार गिराने वाले रिटायर्ड फौजी राम कठिन पांडे का आज निधन हो गया है। जीवन के अंतिम पड़ाव में भी उनकी आवाज और उनके हौसले किसी जवान से काम नहीं थे।
1971 में पाकिस्तान के साथ युद्ध शुरू हुआ। उस समय 10 बिहार बटालियन के राम कठिन पांडे त्रिपुरा में थे। उन्हें आज के बांग्लादेश की सीमा पर बटालियन के साथ कूच करने का आदेश मिला था। पूरा बटालियन जब वहां पहुंचा तो जबर्दस्त युद्ध चल रहा था।सेना में वर्षों तक सेवा देने के बाद सेवानिवृत्त होने के बाद भी राम कठिन पाण्डे के खून में देश की सेवा के लिए हमेशा खून जोर मारता रहा। 10 बिहार बटालियन के फौजी राम कठिन पांडे सेना के वह सेवादार थे, जिन्होंने वतन के लिए अपनी जान की परवाह नहीं की। पाकिस्तान के साथ 1971 में युद्ध में बांग्लादेश की मुक्ति के लिए जबरदस्त संघर्ष किया और जंग में भारत की जीत के सिपाही बने। राम कठिन पांडे युद्ध की कथा जब सुनाते थे तो ऐसा लगता था कि सामने जंग हो रही हो और उस दृश्य को महसूस करने लगते थे। अंतिम समय तक उनके हौसले और जज्बे को कोई परिस्थिति कमजोर नहीं कर सकी।
राम कठिन पाण्डेय 1962 और 1965 के युद्व में भी हिस्सा लिए थे। राम कठिन पाण्डेय को 1971 के युद्ध में चार गोलियां लगीं। तीन गोली दाएं और एक गोली बाएं पैर में लगी। गंभीर ज़ख्म के बावजूद वे दुश्मनों (पाकिस्तानी सेना) को मारते चले गए।अफसर ने इलाज के लिए दबाव डाला पर राम कठिन पाण्डेय ने कहा कि उन्हें ईश्वर ने आदेश दिया है कि वह जंगे मैदान में दुश्मनों को मारे या फिर शहीद हो जाए।
1971 के युद्ध में उनके शौर्य की तारीफ़ की गई। उन्हें सेना मेडल से सम्मानित किया गया।आज उनके निधन से शोक की लहर। राम कठिन पाण्डेय को श्रद्धांजलि देने के लिए रिटायर्ड फौजी भी पहुंचे। रांची के खेलगांव ड्रीम अपार्टमेंट के अपने फ्लैट में उन्होंने अंतिम सांस ली।
उन्होंने अपने पीछे भरा पूरा परिवार छोड़ा है। उनकी सुपुत्री सरिता पांडेय भाजपा में वरिष्ठ नेत्री हैं।सरिता पांडेय ने भावुक होते हुए कहा कि उनके पिता एक बहादुर फौजी थे। परिवार और समाज के लिए आदर्श थे। उनके निधन से परिवार में अपूरणीय कमी आई है।













