बोकारो, झारखंड | 14 अप्रैल 2025
झारखंड के बोकारो जिले में रविवार को पटना पुलिस की एक टीम पर गंभीर आरोप लगे हैं। एक अगवा लड़की की तलाश में आए बिहार के गर्दनीबाग थाने की टीम पर फायरिंग का आरोप है, जिसमें एक स्थानीय फल विक्रेता गोली लगने से घायल हो गया। घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है और झारखंड पुलिस ने इस मामले में तुरंत कार्रवाई करते हुए आठ लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें तीन पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।
क्या है पूरा मामला?
पटना पुलिस को सूचना मिली थी कि एक अगवा नाबालिग लड़की बोकारो के सेक्टर-4 स्थित लक्ष्मी मार्केट इलाके में है। इसी आधार पर गर्दनीबाग थाने से एक टीम—जिसमें ट्रेनी सब-इंस्पेक्टर राजू कुमार, महिला सिपाही रंजना कुमारी और SSP सेल के कर्मी अवनीश शामिल थे—निजी वाहन से झारखंड पहुंची।
बताया जा रहा है कि पूछताछ के दौरान पुलिस ने फल विक्रेता विवेक कुमार (24) से लड़की की जानकारी मांगी। जब उसने लड़की को पहचानने से इनकार किया, तो पुलिस ने कथित तौर पर उसे धमकाया और पिस्टल निकाल ली। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक इस दौरान गोली चल गई, जो विवेक के कंधे में लगी और फिर छिटककर लड़की के भाई को भी घायल कर गई।
घायल को छोड़कर फरार हुई पुलिस
घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। आरोप है कि घायल विवेक को पुलिस टीम भवानी मेडिकल के पास छोड़कर फरार हो गई। स्थानीय एक मेडिकल स्टोर संचालक ने परिजनों को सूचना दी, जिसके बाद विवेक को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। उसकी हालत अब स्थिर बताई जा रही है।
झारखंड पुलिस ने की त्वरित कार्रवाई
घटना की जानकारी मिलते ही झारखंड पुलिस ने बॉर्डर पर चेकिंग शुरू की और कोडरमा में दो अर्टिगा गाड़ियों को रोका। पूछताछ के बाद पुलिस ने तीन पुलिसकर्मियों समेत आठ लोगों को गिरफ्तार कर लिया। इनमें दो ड्राइवर, लड़की का पिता, चाचा और भाई भी शामिल हैं।
दो एफआईआर दर्ज, जांच जारी
चास थाना पुलिस ने घायल विवेक का बयान दर्ज करते हुए दो अलग-अलग FIR दर्ज की हैं। आरोपों की गंभीरता को देखते हुए मामले की जांच तेज़ कर दी गई है। वहीं गर्दनीबाग थाने की पुलिस का दावा है कि कार्रवाई IG के आदेश पर की गई थी।
परिवार में गुस्सा, इंसाफ की मांग
विवेक के भाई अनिल कुमार ने आरोप लगाया कि पटना पुलिस ने बिना किसी ठोस आधार के उसके भाई को गोली मारी और फिर उसे लावारिस हालत में छोड़ दिया। उन्होंने पूरे घटनाक्रम की न्यायिक जांच की मांग की है।
इस घटना ने एक बार फिर से पुलिस कार्रवाई की पारदर्शिता और अंतरराज्यीय समन्वय पर सवाल खड़े कर दिए हैं। झारखंड पुलिस की जांच से आने वाले दिनों में इस केस की तस्वीर और भी स्पष्ट हो सकती है।














