रांची: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास के बारे में जो सूचना आई है, उसके अनुसार वे 10 जनवरी को पार्टी में शामिल होंगे. भाजपा की औपचारिक सदस्यता लेंगे. रघुवर दास पिछले दिनों राज्यपाल पद से इस्तीफा देकर झारखंड लौट आए. उनके समर्थक कहते हैं कि झारखंड में उनके जैसा कोई नेता नहीं. मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने पांच साल बेहतरीन काम किया. अक्टूबर 2023 में उन्हें ओडिशा का राज्यपाल बनाया गया. ओडिशा में भी राज्यपाल के पद को बड़ा बनाकर जनता के करीब ला दिया.
रघुबर दास के राज्यपाल बनने के बाद ओडिशा में भाजपा की सरकार बनी. पर यह सब रघुबर दास को रास नहीं आ रहा था. वू सक्रिय राजनीति में रहने वाले राजनेता रहे थे तो राजभवन की लाटसाहिबी पसंद नहीं आ रही थी.जबकि भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व झारखंड में बाबूलाल मरांडी को फ्री हैंड देना चाहता था. इसलिए रघुबर दास को राजभवन भेज दिया गया. रघुबर दास की इच्छा थी कि वे झारखंड की राजनीति में सक्रिय रहें. झारखंड में भाजपा का एक बड़ा ओबीसी चेहरा रघुबर दास माने जाते रहे हैं.पर केंद्रीय नेतृत्व झारखंड में कोई कंफ्यूजन नहीं रखना चाहता था.हां, उन्हें खुश रखने के लिए उनकी बहू पूर्णिमा दास साहू को अपनी परंपरागत सीट से टिकट दिलवा कर विधायक बनवा लिया है.
रघुबर दास बराबर केंद्रीय नेतृत्व से राज्यपाल पद से उन्हें हटाने की मांग करते रहे. पर चुनाव के माहौल के कारण उन्हें केंद्रीय नेतृत्व नहीं हटाया. झारखंड विधानसभा चुनाव संपन्न हो गया. भाजपा का निराशाजनक प्रदर्शन हुआ.
लोकसभा और विधानसभा चुनाव का परिणाम सबके सामने है. भाजपा को निराशाजनक प्रदर्शन हाथ लगा है. इधर प्रदेश भाजपा में सदस्यता अभियान चल रहा है. फिर सांगठनिक चुनाव होगा. नीचे से चुनाव कराने का लक्ष्य रखा गया है. इस बीच रघुबर दास के झारखंड लौटने पर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है. कहा जा रहा है कि उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा सकता है.पर पुख्ता तौर पर नहीं कहा जा सकता है. अब देखना होगा कि रघुबर दास का पार्टी कहां उपयोग करती है.10 जनवरी को भाजपा की फिर से सदस्यता लेंगे. जोरदार स्वागत की तैयारी चल रही है.












