रांची/नई दिल्ली – बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न देने की घोषणा हुई है अति पिछड़े समाज से ताल्लुक रखने वाले कर्पूरी ठाकुर ने समाज के निचले पायदान पर रहने वाले दलितों के लिए बहुत काम किया उनकी सादगी की चर्चा राजनीति में अक्सर हुआ करती है.कर्पूरी ठाकुर की 100 वीं जयंती के ठीक 1 दिन पूर्व सबसे बड़ा नागरिक सम्मान भारत रत्न देने का ऐलान हुआ है.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घोषणा पर खुशी जताते हुए कहा कि दलितों के लिए उनके द्वारा किए गए काम अमिट रहेंगे .केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी कहा कि उनके संघर्ष को हमेशा याद रखा जाएगा. यह उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है.झारखंड बीजेपी के अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने भी कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न देने की घोषणा पर खुशी जताई और कहा है कि अति पिछड़े समाज के अलावा दलितों को सम्मान दिलाने के लिए उन्होंने संघर्ष भी किया और जरूरत पड़़ने पर उनके कल्याण के लिए काम भी किया.झारखंड बीजेपी के महामंत्री और सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप वर्मा ने भी बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न दिए जाने की घोषणा पर खुशी जताते हुए कहा कि यह एक बड़ा खुशी देने वाला निर्णय है.प्रदीप वर्मा ने यह भी कहा कि उनके संघर्षों के प्रति यह सच्ची श्रद्धांजलि होगी. सामाजिक न्याय के क्षेत्र में उनके काम का कोई जोड़ नहीं है.
उल्लेखनीय है कि कर्पूरी ठाकुर बिहार के दो बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं.पहली बार 1970-71 में और दूसरी बार 1977 से 1979 तक वह मुख्यमंत्री रहे. उनका जन्म 24 जनवरी, 1924 को हुआ था.उनके पुत्र रामनाथ ठाकुर भी बिहार सरकार में मंत्री रह चुके हैं. कर्पूरी ठाकुर शिक्षक भी थे.शिक्षा के क्षेत्र में अंग्रेजी की अनिवार्यता को खत्म करने की पहल उन्होंने की थी.उनका निधन 17 फरवरी,1988 को हुआ था.उनका पैतृक घर बिहार के समस्तीपुर था.
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