चांडिल डैम के विस्थापितों को कब मिलेगा न्याय
रांची:1980 के दशक में डैम बनाने के लिए चांडिल डैम की नींव रखी गई थी.आस पास के गांव के लोगों को उम्मीद जगी कि डैम जब बन कर पूरा हो जाएगा तो उन्हें इसका लाभ मिलेगा. पर यह सपना साकार नहीं हुआ.लेकिन 42 वर्ष बीत जाने के बाद भी अपनी पुर्नवास और नौकरी की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे है. अब चांडिल गांव के लोग राजभवन पहुंच कर अपनी मांग रख रहे है. अब अलग-अलग चरणों में आंदोलन करते रहे हैं लेकिन उनकी मांग आज तक नहीं पूरी हुई सभी राजनीतिक दल उनके प्रति हमदर्दी जरूर जताते हैं लेकिन इसका समाधान नहीं ढूंढते.
धरना पर बैठे विस्थापितों से मिलने राज्यसभा सांसद आदित्य साहू पहुंचे. उन्होंने कहा कि सरकार नींद से सोई है.
सरकार से मिलने के लिए सैकड़ों लोग मांग लेकर पहुंचे हैं.लेकिन उन्हें लोगों से मिलने का भी समय नहीं है.इससे सरकार की मंशा पर सवाल उठता है.चांडिल डैम के विस्थापितों नही पता है कि वे किसके पास गुहार लगाएं.सत्ता में बैठे लोगों को होश ही नहीं है.अब राजभवन से लोगों को उम्मीद है कि इनकी बात को सुना जाएगा.
धरने पर बैठे लोगों का कहना है कि चांडिल से पैदल पद यात्रा कर रांची पहुंचे थे.तब राजभवन से आश्वासन मिलने के बाद वापस गये थे.लेकिन जब वहां से भी कोई बात नहीं हुई तो अब वापस से आमरण अनशन करने को मजबूर हैं. इधर अनशन पर बैठे लोगों की तबीयत बिगड़नी शुरू हो गई है.













