*लोहरदगा लोकसभा सीट : भाजपा की जीत रहेगी बरकरार या ?
लोहरदगा – झारखंड की 14 लोकसभा सीटों में से लोहरदगा एक अत्यंत महत्वपूर्ण और आरक्षित लोकसभा क्षेत्र है यहां पर लोकसभा का चुनाव 1957 से शुरू हुआ.कांग्रेस ने अधिकांश बार चुनाव जीता है. 1957 में झारखंड पार्टी के इग्निस बेक ने जीत दर्ज की थी. उसके बाद से कांग्रेस ने तीन बार लगातार जीत दर्ज किए हैं. इनमें से एक बड़ा नाम कार्तिक उरांव का रहा है जिन्होंने दो बार लगातार 1967 और 1971 में लोकसभा का चुनाव जीता था. 1977 में देश की धारा के अनुरूप जनता पार्टी के लालू उरांव को जीत मिली थी लेकिन कार्तिक उरांव ने फिर 1980 में कांग्रेस का झंडा गाड़ दिया था. 1984 और 1989 में कांग्रेस की सुमंती उरांव चुनाव जीती थीं .भाजपा का पहली बार खाता 1991 में खुला.1996 में भी भाजपा की जीत हुई. दोनों ही चुनाव में ललित उरांव चुनाव जीते थे लेकिन 1998 में इंद्रनाथ भगत जो कांग्रेस के थे, उन्होंने लोहरदगा सीट पर फिर से कब्जा जमाया. 1999 में भाजपा के दुखा भगत चुनाव जीते थे.झारखंड गठन के बाद जब पहली बार लोकसभा का चुनाव 2004 में हुआ तो वर्तमान झारखंड सरकार में वित्त मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव ने कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीता था.कांग्रेस की यह आखिरी जीत थी.यानी 2009 से लेकर 2019 तक भाजपा की ही जीत होती रही सुदर्शन भगत यहां से सांसद चुने जाते रहे.
मोटे तौर पर देखे तो कांग्रेस के खाते में अब तक आठ बार लोहरदगा लोकसभा सीट गई है. बीजेपी ने 6 बार जीत दर्ज की है. इसलिए कांग्रेस के लिए भी यह का महत्वपूर्ण सीट नहीं रही है.
-अब जानिए इस बार की जमीनी हकीकत-
लोहरदगा अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित लोकसभा सीट है. गुमला, लोहरदगा पूरा जिला इस लोक सभा सीट के अधीन आता है. इसके अलावे रांची जिले का मांडर विधानसभा क्षेत्र भी आता है. आदिवासी बहुल इस लोकसभा क्षेत्र में गैर आदिवासियों की संख्या भी अच्छी खासी है.उनके वोट भी काफी महत्व रखते हैं. वर्तमान स्थिति यह है कि भाजपा से समीर उरांव चुनाव लड़ रहे हैं वहीं कांग्रेस की ओर से सुखदेव भगत चुनाव मैदान में हैं. यह मुकाबला रोचक होने का संकेत है.वोटों की गोलबंदी कई मुद्दों पर निर्भर कर रही है.
-वोटों की गोलबंदी का मतलब समझिए-
भाजपा विरोधी वोटों की गोलबंदी करने का प्रयास किया जा रहा है.झारखंड के स्तर पर जो महत्वपूर्ण मुद्दे सरकार में शामिल घटक दल उठा रहे हैं, उनका ग्रामीण क्षेत्रों में असर देखा जा रहा है. हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी और केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई को भी बड़ा मुद्दा बनाने का प्रयास हो रहा है. अल्पसंख्यक और आदिवासी समाज को आकर्षित करने का प्रयास कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा की ओर से हो रहा है. एक और बात गौर करने की है कि पिछले तीन लोकसभा चुनाव में लोहरदगा सीट पर जीत और हर का अंतर 10000 के आसपास रहा है. 2009 में सुदर्शन भगत ने निर्दलीय प्रत्याशी चमरालिंडा को 8283 मतों से पराजित किया था कांग्रेस इस साल तीसरे स्थान पर थी कांग्रेस के रामेश्वर उरांव को 129622 वोट मिले थे वहीं चमरा लिंडा को 136345 मत प्राप्त हुआ था. जबकि विजेता रहे भाजपा के सुदर्शन भगत को 144628 वोट मिले थे.
लोहरदगा सीट पर चुनावी मुकाबला झारखंड मुक्ति मोर्चा के चमरा लिंडा के रणनीति पर निर्भर करता है. अगर चमरालिंडा बहुत ईमानदारी से कांग्रेस के प्रत्याशी के लिए वोट मांगते हैं तो समीर उरांव के लिए परेशानी हो सकती है. इससे स्थिति पर से पर्दा उठना भी बाकी है.
-भाजपा के लिए क्या है बड़ा मुद्दा-
झारखंड में भाजपा ने अपने कोटे के सभी 13 और आजसू की एक सीट को भी जीतने का लक्ष्य निर्धारित किया है. भाजपा के पास मोदी का चेहरा है. मोदी सरकार के 10 साल का काम गिनाने लायक मुद्दा है. इसके अतिरिक्त राम मंदिर जैसा विषय भी लोगों के सामने भाजपा उठाएगी. यह तो भाजपा के लिए अपने मुद्दे हैं. इसके अलावा राज्य की हेमंत और वर्तमान की चंपाई सोरेन सरकार की कथित विफलताओं को भी जोर-जोर से उठाया जाएगा.भ्रष्टाचार का मुद्दा भाजपा के लिए महत्वपूर्ण है और यह राजनीतिक लाभ देने लायक है. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस लोकसभा सीट के अधीन आने वाले कुछ विधानसभा क्षेत्र में भाजपा का संगठन मजबूत है. इसलिए भाजपा को इसका लाभ मिल सकता है.प्रत्याशी के चेहरे को भी लोग जानते हैं और पहचानते भी है.
कमोवेश यह कहा जा सकता है कि भाजपा को मेहनत करने की जरूरत है. केंद्र की मोदी सरकार की योजनाओं के लाभुकों से आशीर्वाद प्राप्त करना होगा. इसके अतिरिक्त बूथ स्तर पर अपने समर्थकों को सही तरीके से पहुंचाना भी जरूरी है. इन सब चीजों पर पार्टी ध्यान दे रही है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोहरदगा लोकसभा सीट पर मुकाबला नजदीकी हो सकता है. भाजपा के प्रदेश महामंत्री और राज्यसभा सदस्य प्रदीप वर्मा का कहना है कि केंद्र की मोदी सरकार के अनगिनत काम को जनता बखूबी जानती है. इस क्षेत्र की जनता यह भी जानती है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा, कांग्रेस और राजद के इस राज्य में शासन काल में क्या हुआ है. भ्रष्टाचार एक बड़ा मुद्दा है. पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आज भ्रष्टाचार के आरोप में जेल में हैं. मोदी की गारंटी है कि भ्रष्टाचारियों को सलाखों के पीछे भेजना है.जनता के हक को लूटने वाले को सबक सिखाना है.इस लोकसभा सीट के मतदाता तमाम चीजों को जानते हैं.इसलिए भाजपा की जीत पक्की है.उधर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर का कहना है कि केंद्र की मोदी सरकार के कथित तानाशाही रवैया और विरोधियों के खिलाफ साजिश को जनता देख रही है. इसलिए आई एन डी आई ए प्रत्याशी की जीत निश्चित है.
मोटे तोर पर यह कहा जा रहा है कि लोकसभा का चुनाव राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर होगा. देश में विकास एक बड़ा मुद्दा यहां के लोगों के लिए होगा. आर्थिक प्रगति,सीमा की सुरक्षा, जनकल्याणकारी योजनाओं का सही तरीके से क्रियान्वयन, कोरोना काल में भारत ने जिस प्रकार से महामारी से निबटने का काम किया ,गरीबी रेखा से बड़ी संख्या में लोग ऊपर आए जिनमें लोहरदगा के लोगों की भी भागीदारी है, ऐसे तमाम मुद्दे भाजपा को जीत दिला सकते हैं. भाजपा को युवाओं के समर्थन का भी भरोसा है.नए-नए मतदाताओं से भी सकारात्मक अपेक्षा है. मोदी सरकार ने महिलाओं के लिए जो काम किया है,वे भी क्रांतिकारी रहे हैं. इसलिए महिलाओं का भी आशीर्वाद जरूर मिलेगा. भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक महाशक्ति के रूप में तेजी से उभर रहा है, यह भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा भाजपा के लिए है. अल्पसंख्यक समाज भी आज की तारीख में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आशा भरी निगाह से देख रहा है. खास तौर पर अल्पसंख्यक समाज की महिलाओं की सोच महत्वपूर्ण है. इंडी गठबंधन के अंदर अंतर्विरोध को भी लोग समझ रहे हैं.भाजपा के पास मोदी जैसा नेतृत्व है जिसकी कमी विरोधियों के पास है.











