मोदी का गारंटी कार्ड चल पड़ा, INDI अलायंस छितराने के कगार पड़*
नई दिल्ली/ रांची- चार राज्यों के विधानसभा चुनाव में से तीन पर भाजपा की जबरदस्ती की हवा ने विरोधियों के घोसले के तिनके को बिखरने के लिए विवश कर दिया है. जबकि 2024 में लोकसभा का चुनाव होना है.इससे पहले कांग्रेस समेत अन्य भाजपा विरोधी दलों ने एक मजबूत गठबंधन बनाने की कोशिश की. इस कोशिश को आगे बढ़ाते हुए एक गठबंधन बनाया भी गया.
भाजपा विरोधी राजनीतिक दलों ने मिल बैठकर एक नाम इस गठबंधन को दिया जिसे इंडिया कहा जाने लगा. शुरू में बड़े ही जोर शोर के साथ इसकी नींव रखी गई. नींव पर महल बनाने की कोशिश हुई.गाड़ी थोड़ी और बढ़ी.कुछ ईंट जोड़े गए.
सभी क्षेत्रीय दल के साथ कई बैठकें हुईं. बैठक में बड़े-बड़े दावे किये गए. बात सीट शेयरिंग तक गई. लेकिन कुछ चीज ऐसी हो जाती हैं जो आपके हिसाब से आगे नहीं बढ़ती है. तिनका- तिनका जोड़कर आशियाना बनाने का प्रयास किया गया. तीन हिंदी राज्यों राजस्थान मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भाजपा की जबरदस्त जीत से इस गठबंधन को तगड़ा झटका लगा है गठबंधन के अन्य घटक दल अपने बड़े भाई कांग्रेस पर ही बरस रहे हैं कुछ तो कांग्रेस को घमंडी बता रहे हैं.गठबंधन के नेता ही एक दूसरे पर हमलावर दिखे और एक दूसरे पर शब्दों के बान छोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी. भाजपा नेताओं का कहना है कि इस प्रकार की यह रिलायंस बनाए गए हैं वह आरंभ से ही विरोध भाषी रहे हैं कई ऐसे दल इस कुनबे में है जो एक दूसरे के दुश्मन है
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खुद जाने से परहेज किया है.ममता बनर्जी ने बैठक की जानकारी नहीं होने का तर्क दिया. झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी 6 दिसंबर को होने वाली बैठक में शामिल होने में असमर्थता जताई उन्होंने कहा कि उनके पहले से कार्यक्रम तय हैं. अब बैठक 18 दिसंबर को होगी.तीन हिंदी राज्यों के चुनाव परिणाम से जहां भाजपा का हौसला बढ़ा हुआ है, वहीं इसके विरोधी कांग्रेस , राजद, जेएमएम के तेवर ढीले पड़े हैं. प्रदेश महामंत्री प्रदीप वर्मा का कहना है कि देश में मोदी गारंटी को लोग पसंद कर रहे हैं.हर क्षेत्र के विकास के लिए मोदी गारंटी पर लोग विश्वास करने लगे हैं.













