रांची- झारखंड में भाजपा सभी आदिवासी आरक्षित लोकसभा सीटों पर हार गई. एक भी सीट उसके पास नहीं रही.इसको लेकर पार्टी के अंदर मंथन का दौर जारी है.लोकसभा स्तरीय समीक्षा बैठक में इतना ही नहीं बल्कि बहुत कुछ सामने आ रहा है.पार्टी के प्रमुख नेताओं पर गंभीर आरोप लग रहे हैं.दुमका की लोकसभा प्रत्याशी सीता सोरेन ने साफ तौर पर कहा है कि चुनाव के दौरान दुमका में जो भाजपा के कैडर हैं,वे मनमानी कर रहे थे किसी का उन पर नियंत्रण नहीं था.यहां तक की विधायक रणधीर सिंह, पूर्व विधायक लुईस मरांडी, पूर्व सांसद सुनील सोरेन व्यक्तिगत रूप से खड़े हुए दिख रहे थे लेकिन वह भी बिक गए थे.उन लोगों ने चुनाव में कोई सकारात्मक भूमिका नहीं निभाई.सीता सोरेन ने यहां तक का दल की बाबूलाल मरांडी और संगठन के अन्य पदाधिकारी भी चुनाव में बहुत मुस्तादी के साथ यहां पर नहीं लग रहे सीता सूर्य ने साफ तौर पर कहा कि अगर सब कुछ ठीक-ठाक रहता तो वह बहुत बड़े मार्जिन से लोकसभा का चुनाव जीत जातीं.सीता सोरेन के बयान को लेकर पार्टी के अंदर खलबली मची हुई है.प्रभारी से लेकर जिला अध्यक्ष सभी पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
इस मसले पर प्रदेश महामंत्री और राज्यसभा सांसद आदित्य साहू ने कहा कि जब चुनाव में हार मिलती है तो तरह-तरह के आरोप लगाते हैं.उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव में न सिर्फ दुमका बल्कि सभी लोकसभा क्षेत्र में पार्टी के नेता और कार्यकर्ताओं ने बहुत मेहनत की और निष्ठा से काम किया. झारखंड में भाजपा ने 9 सीटों पर जीत हासिल की है.आजसू को एक सीट गिरिडीह मिली.
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